विधायक ने शिक्षा सचिव कौ सौंपा ज्ञापन

विधायक ने शिक्षा सचिव कौ सौंपा ज्ञापन

खूंटी, 6 जून (हि.स.)। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटीइटी) नियमावली 2025 के ड्राफ्ट में खूंटी जिले के लिए जनजातीय भाषा के विकल्प से मुंडारी भाषा को हटाए जाने का मामला गरमाता जा रहा है। विभिन्न दलों के लोग सोशल मीडिया पर इससे संबंधित सवाल उठा रहे हैं।

तोरपा के विधायक सुदीप गुड़िया ने शुक्रवार को शिक्षा विभाग के सचिव से मुलाकात कर मुंडारी भाषा को पुनः जनजातीय भाषा के विकल्प में शामिल करने की मांग की। विधायक ने सचिव को अवगत कराया कि खूंटी जिला मुंडा बहुल क्षेत्र है और यहां की मूल जनजातीय भाषा मुंडारी है। ऐसे में मुंडारी को विकल्प से हटाना न केवल स्थानीय पहचान और संस्कृति के साथ अन्याय है, बल्कि यह भगवान बिरसा मुंडा, मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा और अन्य जनजातीय आंदोलनकारियों के योगदान का भी अपमान है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुंडारी भाषा को हटाया जाना न तो तर्कसंगत है और न ही संवैधानिक भावना के अनुरूप। विधायक ने मांग की कि नियमावली के अंतिम प्रकाशन से पहले मुंडारी भाषा को खूंटी जिले के लिए पुनः जनजातीय भाषा के रूप में शामिल किया जाए। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सौरव कुमार साहू ने कहा कि खूंटी के विधायक और सांसद मुंडा, मुडा बहुल खूंटी जिला और प्रमुख क्षेत्रीय भाषा मुंडा है। मुंडारी झारखंड की प्रमुख जनजातीय भाषाओं में से भी एक है, लेकिन हेमंत सरकार ने जेटीइटी नियमावली में खूंटी की जनजातीय-क्षेत्रीय भाषा में मुंडारी को ही शामिल नहीं किया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सरकार जल्द अपनी गलती सुधारे और खूंटी की मुंडारी भाषा में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के साथ न्याय करे। मुरहू के सांसद प्रतिनिधि धर्मदास कंडीर ने भी मुंडारी भाषा को झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली 2025 के ड्राफ्ट में विकल्प में मुंडारी को शामिल नहीं करने पर आपत्ति जताई है।

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