देश के साथ यह कैसी वफादारी ? कांग्रेस क्यों अड़ी है सेना के गिरे हुए फाइटर जेट्स जानने में!
डॉ. मयंक चतुर्वेदी
युद्ध केवल सामरिक नहीं होता, जब होता है तब कई मोर्चों पर एक साथ होता है। जिसमें कि सबसे अधिक कठिन कुछ है तो वह अपनों के व्यर्थ पूछे जा रहे सवालों के जवाब देने के मोर्च पर खरा उतरना है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का लोहा पूरी दुनिया ने माना, पर हमारे अपने कुछ लोग हैं जो लगातार रह-रह कर अपनी ही सरकार पर प्रश्न खड़े कर रहे हैं। जबकि उन्हें यह देखना चाहिए कि इससे बड़ी सफलता क्या होगी कि पाकिस्तान को दिए गए भारतीय सैन्य जवाब के बाद हमारी स्वदेश आधारित तकनीक पर दुनिया के कई देशों ने भरोसा जता दिया। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है भारतीय सैन्य सामग्री निर्माण करनेवाली कंपनियों के शेयर में आया भारी उछाल।
इसके साथ ही हमारी सफलता की सीमा रेखा इससे भी तय होती है जो भारतीय सेना की तरफ से बताया गया था। सेना ने सार्वजनिक जानकारी दी थी कि उसने पाकिस्तान प्रायोजित पहलगाम आतंकी हमले के बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए 6-7 मई को पाकिस्तान के बहावलपुर, मुरीदके, मुजफ्फराबाद, कोटली, रावलकोट, चकस्वारी, भीमबेड़ और चकवाल स्थित आतंकी संगठन लश्करे-तैयबा के आतंकी प्रशिक्षण केंद्रों पर हमला किया। अगले दिन जब पाकिस्तान ने भारतीय शहरों व सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की तो भारत ने नूर खान, मुरीद, सरगोधा, भोलारी, स्कारू, जकोबाबाद समेत कुछ अन्य शशहरो में स्थिति पाकिस्तानी वायु सेना व सैन्य अड्डों को निशाना बनाया।
वस्तुत: दी गई यह जानकारी यहीं समाप्त नहीं होती, अब इसके आगे जो जानकारी पाकिस्तान की ओर से दी गई, वह इससे भी अधिक महत्व की है। आज पाकिस्तान डोजियर जो विदेशी सरकारों, मीडिया एवं थिंक टैंक के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है, वह कुछ और ही कहानी कह रहा है; उसके अनुसार भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के पेशावर ( खैबर पख्तूनख्वा), हैदराबाद व छोर (सिंध), गुजरात, बहावलनगर, अटोक, और झांग (पंजाब) पर भी हमला किया गया था। जबकि इन शहरों का भारत ने कभी नाम नहीं लिया कि इन्हें भी उसकी तरफ से निशाना बनाया गया। यहां विशेष ध्यान देने वाली बात यह है कि पाकिस्तान ने जितने नये शहरों के नाम बताये हैं, उन सभी में पाकिस्तान सेना के बड़े अड्डे हैं, उसका अधिकांश गोला-बारूद, लड़ाकू विमान, मिसाइल इन जगहों पर रखी जाती रही हैं।
ऐसे में ऑपरेशन सिंदूर के बाद के परिणाम में इसका एक अर्थ यह निकलता है कि जितना भारत ने कहा, उससे कहीं अधिक चोट भारत की तरफ से पाकिस्तान को दी गई है। फिर भी भारत के भीतर कांग्रेस समेत कुछ दलों के प्रमुख नेता हैं जो कोशिश यही करते दिख रहे हैं कि कैसे वह ऑपरेशन सिंदूर को असफल सिद्ध कर पाएं। कांग्रेस उन विदेशी समाचारों के हवाले से मोदी सरकार के पीछे पड़ी है, जिसमें यह बताया गया था कि इस ऑपरेशन में भारत को कई फाइटर जेट्स का नुकसान उठाना पड़ा है। जिसमें कि संख्या छह तक बताई गई है, पर क्या वास्तव में ऐसा हुआ? भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने फाइटर जेट्स के नुकसान की बात में पाकिस्तान के इस दावे को बिल्कुल गलत बताया है।
वैसे, कांग्रेस को इतना तो पता ही होगा कि नेता प्रतिपक्ष चाहें तो स्वयं इस बारे में प्रधानमंत्री अथवा देश के गृहमंत्री से मिलकर सभी तथ्य जान सकते हैं, यह उनका संविधानिक अधिकार है, पर वह ऐसा नहीं करके सड़क पर आम जनता के बीच, मीडिया में शोर कर रहे हैं कि देखो; कैसे मोदी सरकार में ऑपरेशन सिंदूर फैल हो गया? इस बारे में वक्तव्य एवं टिप्पणियां इतनी अनुचित हैं कि आज कई कांग्रेस समर्थक भी इन्हें देखने एवं पढ़ने पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं। कहना होगा कि जिसे पूरी दुनिया सफल ऑपरेशन मान रही है, कांग्रेस उसे हर हाल में असफल सिद्ध करने पर तुली हुई है।
इस संदर्भ में दुनिया भर के यु्द्ध स्थितियों एवं नुकसान के उदाहरण कांग्रेस एवं अपने देश की सरकार की आलोचना करनेवाले अन्य विपक्षी दलों को एक बार अवश्य देखना चाहिए और उनके अध्ययन से यह समझना चाहिए कि युद्ध छोटा हो या बड़ा नुकसान दोनों पक्षों को ही होता है। भारत ने शुरू से कभी यह दावा नहीं किया है कि उसे कोई नुकसान नहीं हुआ, किंतु अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्थाओं को जो साक्ष्य मिले, उसमें यही पाया गया कि इस ऑपरेशन में भारत की एक तरफा जीत हुई है। नुकसान के स्तर पर उनके हाथ अब तक कुछ नहीं लगा। जिन भारतीय फाइटर जेट्स के नुकसान की बात कही भी गई, उसका मलवा तक कहीं नहीं मिला, जबकि दूसरी ओर पाकिस्तान द्वारा भारत पर छोड़ी गई मिसाइल और अन्य अस्त्रों का मलवा कई सीमावर्ती क्षेत्रों में पड़ा हुआ था।
वास्तव में भारतीय वायुसेना ने 6-7 मई की रात्रि से लेकर 10 मई तक अपनी जो कार्रवाई की, उसमें पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। पाकिस्तान ने दो “एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम” (एडब्ल्यूएसीएस) को हमेशा के लिए खो दिया। यह एक ऐसा विमान होता है जोकि लंबी दूरी से हवाई क्षेत्र की निगरानी करता है। दुश्मन के विमानों, मिसाइलों और ड्रोन को ट्रैक करता है। एक शक्तिशाली रडार सिस्टम से लैस होता है और 360 डिग्री कवरेज प्रदान हुए सैकड़ों किलोमीटर दूर तक की गतिविधियों का पता लगा सकता है। इसके साथ ही छह लड़ाकू विमान, 1 सी-130 विमान, 30 से अधिक मिसाइलें, कई मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) और मानव रहित लड़ाकू ड्रोन (यूसीएवी) को भारतीय एयरफोर्स ने नष्ट कर दिया था। भारत ने अपनी सुदर्शन मिसाइल के द्वारा 300 किलोमीटर दूर से लंबी दूरी के लिए सटीक निशाना साधा था। पाकिस्तान के भोलारी एयरबेस पर किए गए स्ट्राइक में एक स्वीडिश एयरक्राफ्ट (एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) भी नष्ट कर दिया गया। राफेल और एसयू-30 की स्ट्राइक में ‘विंग लूंग’ श्रृंखला के कई मध्यम ऊंचाई वाले लंबे समय तक चलने वाले चीनी ड्रोन को नष्ट किया था।
कुल मिलाकर भारत से हर मोर्चे पर मार खाने के बाद सीजफायर के लिए पाकिस्तान निवेदन करने लग गया था, जिसके बाद भारत ने सीजफायर के लिए अपनी स्वीकृति दी, लेकिन साथ में यह शर्त भी जोड़ दी कि यह ऑपरेशन सिंदूर आगे तभी तक रुका हुआ है, जब तक पाकिस्तान एक अच्छे पड़ोसी की भूमिका में है। यदि फिर आतंकी हरकत उसकी तरफ से हुई तो जवाब इस बार से अधिक सख्त दिया जाएगा। पर कांग्रेस है कि लगता है कुछ समझना ही नहीं चाहती । आज जिस तरह से वह प्रश्न उठा रही है, एक बड़ी सफलता के बाद भी केंद्र की मोदी सरकार को घेर रही है, उससे यही लग रहा है कि वह जाने-अनजाने पाकिस्तान को ही बल प्रदान कर रही है। फिलहाल सेना के गिरे हुए फाइटर जेट्स जानने में उसकी रुचि इस ओर ही इशारा करती है।
(लेखक, हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)
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