हमें अपने पुरखों कें सरना धर्म को बचाकर रखना है: जयराम पाहन
खूंटी, 1 जून (हि.स.)। तोरपा प्रखंड के तपकरा कालेट में रविवार को सरना प्रार्थना सह युवा सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में सरना धर्म अगुवा जयराम पाहन ने कहा कि प्रकृति पूजक आदिवासी सदियों से अपने पुरखों की व्यवस्था के अनुरुप चलते आ रहे हैं और हमें पुरखों के सरना धर्म को बचाए रखना होगा, तभी आदिवासी समाज सुरक्षित रहेगा। डॉ मीनाक्षी मुंडा ने कहा कि हमारे समाज को एक नई दिशा देने के लिए शिक्षा बहुत ही महत्वपूर्ण हैं।
आज हम आदिवासी प्रकृति पूजक सरना धर्म मानने वाले लोग सरना धर्म कोड की मांग कर रहे हैं, ताकि हमें केंद्र के जनगणना कॉलम अलग से जगह मिले। सरना धर्म कोड नहीं होने के कारण आज आदिवासी व्यवस्था खत्म हो रही हैं।
जिला परिषद अध्यक्ष मसीह गुड़िया ने कहा कि युवाओं की उपस्थिति समाज को जगा सकती है और इतिहास को दोहरा सकती हैं, बशर्तें हम नशापान से दूर रहें।
कोलय ओड़ेआ ने कहा कि सरना धर्म और पुरखौती भाषा-संस्कृति, परंपरा और रीति-रिवाज को संरक्षित करते हुए आज हमें जल, जंगल, जमीन को भी बचाना होगा। तभी हम सुरक्षित होंगे। केंद्रीय धर्म गुरु भईया राम ओड़ेया ने कि सिंङबोगा की अर्जी गोवारी से खुशी और शांति मिलेती है।
सरना धर्म बचेगा, तभी प्रकृति बचेगी। कार्यक्रम में धनी पाहन, लुथडू मुंडा, अनिल गुड़िया, डॉ सीताराम मुंडा, दुलारी बरला, बिरसा गुड़िया, मुनुवा गुड़िया, जीतू पाहन, अंजलि कंडुलना, सुनील गुड़िया, जिप अध्यक्ष मसीह गुड़िया, जयपाल मुंडा, संतोषी तोपनो, सनिका मुंडा सहित अन्य उपस्थित थे।
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