सुप्रीम कोर्ट ने वकील को जांच एजेंसी से सीधे समन जारी करने पर उठाया सवाल
नई दिल्ली, 25 जून (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी मामले से जुड़े वकील को पुलिस या जांच एजेंसियों की ओर से पूछताछ के लिए बुलाना वकालत की पेशे की स्वायत्तता को कमजोर करेगा। जस्टिस केवी विश्वनाथन की अध्यक्षता वाली वेकेशन बेंच ने पूछा कि क्या कोई जांच एजेंसी किसी पक्ष के वकील को सीधे समन जारी कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अटार्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन के अध्यक्ष से राय मांगी है।
दरअसल, गुजरात में 2024 में दो पक्षों के बीच हुए समझौते से जुड़े मामले में एक पक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। उस पक्ष की गिरफ्तारी के बाद उसकी तरफ से जिस वकील ने जमानत दिलाई, बाद में पुलिस ने उस वकील से पूछताछ के लिए समन जारी किया था। हाई कोर्ट ने समन को रद्द करने से इनकार कर दिया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अरविंद दातार को ईडी ने समन जारी किया था। ईडी के समन की विभिन्न बार एसोसिएशन ने आलोचना की थी। इस मामले पर हुए हंगामे के बाद ईडी ने समन वापस ले लिया था। ईडी ने वरिष्ठ वकील प्रताप वेणुगोपाल को भी नोटिस जारी किया था। इस नोटिस की भी आलोचना होने पर ईडी ने समन वापस ले लिया था। बाद में ईडी ने दिशानिर्देश जारी कर कहा था कि किसी भी वकील को नोटिस जारी करने से पहले ईडी के डायरेक्टर से अनुमति ली जाए।
हिन्दुस्थान समाचार/संजय
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