इस अवसर पर मंत्री रामविचार नेताम ने तपेश्वर महादेव की यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं, शिवभक्त कावड़ यात्रियों के लिए विशेष भंडारे का आयोजन कराया। उन्होंने स्वयं प्रसाद वितरण करते हुए श्रद्धालुओं के साथ आत्मीय संवाद किया, उनकी यात्रा के अनुभव जाने और उनकी आस्था को नमन किया।
कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को समर्पित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें मंत्री नेताम ने पारंपरिक कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और राज्य की सांस्कृतिक समृद्धि को छत्तीसगढ़ की पहचान बताया। उन्होंने कहा कि, सावन का महीना पूरे भारतवर्ष में शिव आराधना का पुण्यकाल माना जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ की धरती पर इसकी अनुभूति कुछ और ही विशेष होती है। यहां भक्ति केवल आस्था नहीं, जीवन का हिस्सा है और तपेश्वर धाम इस परंपरा का जीवंत प्रतीक है। यह स्थान केवल धार्मिक महत्ता का केंद्र नहीं, हमारी सांस्कृतिक धरोहर भी है। मंत्री नेताम ने कहा कि, मकर संक्रांति जैसे अवसरों पर जब देशभर से कलाकार यहां आते हैं, तो यह धरती एक विशाल सांस्कृतिक रंगमंच में बदल जाती है और आज उसी मंच पर हमारे स्थानीय कलाकार अपनी मिट्टी की सुगंध, अपनी विरासत, अपने संस्कारों को जीवंत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे स्थानीय कलाकार केवल मनोरंजन नहीं करते, वे हमारे समाज की स्मृति हैं। वे हमारी संस्कृति के संवाहक हैं। उनकी कला हमारी पीढ़ियों की पहचान है, इसलिए उन्हें उचित मंच, सम्मान और संरक्षण देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष हीरामुनी निकुंज, उपाध्यक्ष धीरज सिंहदेव, जनपद पंचायत बलरामपुर अध्यक्ष सुमित्रा चेरवा, नगरपालिका अध्यक्ष लोधी राम एक्का, उपाध्यक्ष दिलीप सोनी, रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष ओमप्रकाश जायसवाल, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व आनंद राम नेताम, सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण मौजूद रहे।