रविवार को मानसून की रफ्तार कुछ धीमी रही और प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम साफ बना रहा। इससे लोगों ने राहत की सांस ली। बीते 24 घण्टों के दौरान चम्बा जिला के जोत में सर्वाधिक 30 मिमी, शिमला के कुफरी में 20 मिमी और शिमला, चौपाल, कंडाघाट, पांवटा, सोलन और नारकंडा में 10 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई।
प्रदेश में भूस्खलन के चलते जनजीवन प्रभावित हो रहा है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार रविवार को भूस्खलन के कारण एक नेशनल हाईवे समेत 227 सड़कें बंद रहीं। मंडी जिला सबसे अधिक प्रभावित है, जहां 172 सड़कें और एनएच-22 ठप पड़े हैं। मंडी के सराज उपमंडल में ही 93 सड़कें बाधित हैं। बिजली और पानी की आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। यहां 30 जून को बादल फटने से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। प्रदेश में 76 बिजली ट्रांसफार्मर और 787 पेयजल योजनाएं बंद पड़ी हैं। अकेले मंडी में 68 ट्रांसफार्मर और 175 पेयजल योजनाओं पर असर पड़ा है, जबकि कांगड़ा में 612 पेयजल योजनाएं और हमीरपुर में 166 ट्रांसफार्मर प्रभावित हुए हैं।
मानसून सीजन में अब तक बारिश जनित हादसों में 95 लोगों की मौत हो चुकी है, 33 लापता हैं और 175 घायल हुए हैं। सबसे ज्यादा 21 मौतें मंडी में, कांगड़ा में 14, कुल्लू में 10, चंबा में 9 और हमीरपुर व बिलासपुर में 7-7 लोगों की मौत दर्ज की गई है। इस दौरान राज्य में 1007 मकान आंशिक या पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए, 185 दुकानें और 785 गौशालाएं तबाह हो चुकी हैं। मंडी जिले में सबसे अधिक 809 घर, 163 दुकानें और 638 गौशालाएं प्रभावित हुई हैं।
आपदाओं से पशुपालन और कृषि को भी नुकसान पहुंचा है। अब तक 21,500 पोल्ट्री पक्षियों और 953 अन्य पशुओं की मौत हो चुकी है। 20 जून से अब तक बादल फटने की 22, फ्लैश फ्लड की 31 और भूस्खलन की 18 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन आपदाओं से प्रदेश को अब तक करीब 751 करोड़ की संपत्ति का नुकसान हो चुका है, जिसमें जल शक्ति विभाग को 408 करोड़ और लोक निर्माण विभाग को 327 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।