नागपंचमी के मौके पर शहर में स्थित बाबा भोलेनाथ के प्रिय वासुकी की पूजा अर्चना करने के लिए नागवासुकी मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर, ब्रम्हेश्वर महादेव मंदिर, शिवकुटी में स्थित कोटेश्वर महादेव मंदिर, पाण्डेश्वर महादेव मंदिर, तक्षक मंदिर, सहित अन्य शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी हुई है। ऐसी मान्यता है कि काल सर्प से मुक्ति के लिए मंदिरों में बहुत से लोग सुबह से विशेष पूजा करने के लिए पहुंचे हुए हैं।निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर बलबीर गिरी ने बताया कि पुराणों में ऐसा बताया गया है कि समुद्र मंथन के बाद भगवान विष्णु के आदेश पर नागों के राजा वासुकी प्रयागराज के दारागंज स्थित ऊंचे स्थान पर आराम किया था। जिससे इस स्थान पर मौजूद मंदिर को नागवासुकी मंदिर कहा जाता है। इस मंदिर में श्रावण मास में पूजा करने से सर्पकाल दोष समाप्त हो जाता है। नागपंचमी के मौके पर इस मंदिर में भारी भीड़ लगी हुई है।