विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के प्रथम पूजा विधान पाट-जात्रा 24 जुलाई को

जगदलपुर, 23 जुलाई । देश-दुनिया में अपनी अनूठी परंपरा के लिए विश्व प्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा पर्व वर्ष 2025 के पाट-जात्रा पूजा विधान श्रावण हरियाली अमावस्या के दिन 24 जुलाई को मां दंतेश्वरी मंदिर के सामने प्रात: 11 बजे सम्पन्न किया जाएगा। इस पूजा विधान को पूरा करने के लिए मंगलवार देर शाम को ग्राम बिलोरी के जंगल से साल के पेड़ का चयन कर पूजा अर्चना कर काटा गया। इस लकड़ी से रथ निर्माण के लिए बनाये जाने वाले औजार टुरलू खोटला अर्थात विशालकाय हथौड़ा बनाया जायेगा, जिसे दंतेश्वरी मंदिर जगदलपुर के सामने ग्रामीणों के द्वारा लाई गई, जिसकी परंपरानुसार अन्य परंपरागत रथ निर्माण के औजारों के साथ पूजा कर 75 दिवसीय बस्तर दशहरा का शुभारंभ किया जायेगा। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के प्रथम पूजा विधानपाट-जात्रा में बस्तर दशहरा कमेटी के पदेन अध्यक्ष बस्तर सांसद महेश कश्यप सहित बस्तर संभाग के जनप्रतिनिधि गणमान्य नागरिक, मांझी-चालकी, पुजारी, रावत एवं जन समुदाय उपस्थित होंगे।

बस्तर दशहरा कमेटी के पदेन अध्यक्ष बस्तर सांसद महेश कश्यप ने बताया कि रथ निर्माण करने वाले कारीगरों एवं मांझी चालाकी, मेंबरीन के साथ जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में पूजा विधान के साथ पाट जात्रा की रस्म संपन्न होगी। इसके साथ ही बस्तर दशहरा के दुमंजिला रथ निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ हो जायेगी।

दंतेश्वरी मंदिर के मुख्य पुजारी कृष्ण कुमार पाढ़ी ने विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के विभिन्न पूजा विधानों की तिथिनुसार दी गई जानकारी में बस्तर दशहरा हरियाली अमावस्या 24 जुलाई को पाट-जात्रा पूजा विधान से प्रारंभ होकर, 21 सितंबर काछन गादी, 23 सितंबर कलश स्थापना और जोगी बिठाई, 24 से 29 सितंबर तक रथ परिक्रमा के साथ मांई जी की विदाई पूजा विधान 7 अक्टूबर तक बस्तर दशहरा जारी रहेगा।