याचिका में अधिवक्ता पीसी भंडारी और अधिवक्ता टीएन शर्मा ने आवासन मंडल की ओर से बी टू बाईपास से सांगानेर के बीच की कई बीघा जमीन को अवाप्त कर कब्जाधारियों को अवार्ड जारी किए थे, लेकिन इन जमीनों का कब्जा नहीं लिया गया था। इस दौरान प्रभावशाली लोगों ने इस जमीन पर कब्जा कर लिया और करीब 86 कॉलोनियां काटकर सोसाटियों के पट्टे जारी कर दिए। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार के अधिकारियों ने भू माफियाओं से मिलीभगत कर आवासन मंडल के स्वामित्व की इस जमीन का कब्जा धारियों के पक्ष में नियमन करने का निर्णय ले लिया। वहीं नगरीय विकास विभाग ने गत 12 मार्च को इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया। याचिका में गुहार की गई है कि आवासन मंडल की जमीन का अतिक्रमियों के पक्ष में नियमन होने से रोका जाए और मौके पर हुए अतिक्रमणों को भी हटाया जाए। वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता मनोज कुमार शर्मा ने अदालत को बताया कि इस भूमि पर तीन दशक से अधिक की अवधि से लोग रह रहे हैं। जमीन की अवाप्ति का मूल उद्देश्य अब पूरा होना भी संभव नहीं है। ऐसे में यहां बसी कॉलोनियों के निवासियों को सुविधाएं देने के लिए इसका नियमन करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही एएजी ने याचिका का जवाब पेश करने के लिए समय मांगा। इस पर अदालत ने मामले में यूडीएच की ओर से जारी गत 12 मार्च के आदेश पर रोक लगा दी है।