दोनों ग्रामीण अपने बैल को खोजने जंगल गए थे। इस दौरान अचानक भालू सामने आ गया और उस पर काबू पाने से पहले ही उसने हमला बोल दिया। ग्रामीण किसी तरह भागकर जान बचाने में सफल हुए। उन्हें पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फलासिया ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए उदयपुर रेफर कर दिया गया। दोनों के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं।
पानरवा वन क्षेत्र के रेंजर राजेश ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है।
घायल मोतीलाल ने बताया कि उनका बैल एक सप्ताह से घर नहीं लौटा था और वह उसे ढूंढने रोज जंगल जा रहे थे। बुधवार शाम करीब साढ़े चार बजे बैल को खोजते समय भालू ने अचानक मोहनलाल पर हमला कर दिया। उन्हें बचाने की कोशिश में भालू ने मोतीलाल पर भी हमला किया, जिससे उनके सिर और कान पर चोट लगी। उन्होंने बताया कि शोर मचाने पर भालू भाग गया। मोतीलाल के हाथ और पैर में भी चोटें आईं और पैर पर 12 टांके लगे हैं।
फुलवारी की नाल अभयारण्य उदयपुर से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित है और कोटड़ा, मामेर तथा पानरवा रेंज में फैला हुआ है। करीब 511 वर्ग किमी में फैले इस अभयारण्य में इस वर्ष हुई वन्यजीव गणना के दौरान 48 भालू दर्ज किए गए हैं। यहां की तीनों रेंज में लगभग 133 गांव भी बसे हुए हैं।