हर साल सामूहिक रूप से ग्रामीण पहाड़ी बाबा की विधिवत रूप से पूजा अर्चना करते हैं। काफी संख्या में लोग ढोल बाजे के साथ पहाड़ी की चोटी में पहुंचे और एक बड़े शिला पर दूध और गुड़ चढ़ाए। साथ ही बाबा को खीर का भोग लगाया। मुर्गे और बकरे की बलि दी गई।
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्णिया पहाड़ी गिद्धौर और पत्थलगडा प्रखंड के सीमाने में अवस्थित है। यह पहाड़ी ग्रामीणों की बाहरी विपदा से रक्षा करती है। हर साल अच्छी फसल की कामना को लेकर यहां पूजा अर्चना की जाती है। पाहन के जरिये जनजातीय परंपरा के अनुरूप पूजा की गई। बंदरचुंआ के राकेश कुमार ने बताया कि पूर्णिया पहाड़ी के प्रति आसपास के ग्रामीणों की अटूट आस्था है। मान्यता है कि यह पहाड़ी प्राकृतिक प्रकोप से क्षेत्र वासियों की रक्षा करती है। पहले दूध और लावा पीने के लिए साक्षात नाग देवता ग्रामीणों को दर्शन देते थे। हाल के दिनों से नाग देवता अंतर्ध्यान हो गए हैं।