इस अवसर पर लोगों ने पूर्णिमा का अवकाश रखा एवं शुभ मुहूर्त के अनुसार जनेऊ यानी यज्ञोपवीत बदले। पंडितों ने यजमानों को रक्षा सूत्र के रूप में कलावे बांधे। वहीं बहनों ने भी भाइयों की कलाइयों पर भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक एवं भाइयों की सुरक्षा की कामना के साथ राखियां व रक्षा सूत्र बांधे।
बहनें राखियों में भी कलावे के धागे को प्राथमिकता देती देखी गयीं। नगर की आराध्य देवी माता नयना के मंदिर में भी इस अवसर पर सुबह 11 बजे से श्रावणी उपाकर्म-ऋर्षि तर्पण का विशेष आयोजन हुआ, इस दौरान भी लोगों ने सामूहिक तौर पर प्राण प्रतिष्ठा के उपरांत नये यज्ञोपवीत धारण किये एवं पुराने पहले यज्ञोपवीतों का विसर्जन किया। सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को रक्षाबंधन की बधाइयां देने का सिलसिला भी दिखायी दिया।