लखावत ने कहा कि महाराजा दाहरसेन को स्मरण करना हिंदुस्तान के सभी दुश्मनों को रेखांकित करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि जिन बाहरी आक्रांताओं का बड़े साहस से मुकाबला किया, वही मानसिकता आज भी मौजूद है, और ऐसे तत्वों को नेस्तनाबुद किए बिना चैन से नहीं बैठा जा सकता। अखंड भारत की कामना हम सबके भीतर अलख की तरह जलती रहनी चाहिए।
पूर्व उपमहापौर सपंत सांखला ने कहा कि महाराजा दाहरसेन का संपूर्ण जीवन वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत है। दाहरसेन को इतिहास में सदैव सिंधु संस्कृति व हिंदू कुल रक्षक के रूप में स्मरण किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने किया। धन्यवाद कंवल प्रकाश किशनानी ने किया
पुष्पाजंलि कार्यक्रम में मोहन तुल्सीयानी, सुरेन्द्र चूंडावत, अजय कपूर, शिव प्रसाद गौतम, मुकेश खींची, शैलेन्द्र परमार, दुर्गा प्रसाद शर्मा, संदीप धाभाई, जुगल श्याम छापरवाल, सुभाष पाराशर, शैलेन्द्र, लव पारीक, दिनेश चौधरी मुकेश, लक्ष्मण दास तनुमरिया आदि उपस्थित थे।