हिंदी संस्कृति अस्मिता की है धरोहर : पांडे

इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि डॉ जंग बहादुर पांडे ने कहा कि हिंदी में अपार अभिव्यक्ति की क्षमता है। हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि संस्कृति और अस्मिता की धरोहर है।

उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्यिक सृजन समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी साधन है। इसलिए युवाओं से हिंदी लेखन और पठन को जीवंत और अपने जीवन के अभिन्न हिस्सा बनाने की जरूरत है।

इस अवसर पर अजय राय ने कहा कि हिंदी दिवस आत्ममंथन का अवसर है। हमें हिंदी को घर की भाषा भर न मानकर कार्यक्षेत्र और व्यवसाय की भाषा बनाना होगा।

मौके पर सबों ने हिंदी साहित्य भारती आने वाले वर्ष में पूरे राज्य में हिंदी जागरूकता अभियान चलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन बलराम पाठक ने किया। धन्यवाद ज्ञापन अरुण अग्रवाल ने दिया। कार्यक्रम में डॉ. बासुदेव प्रसाद, डॉ. अभिषेक, अरुण अग्रवाल, सुकुमार झा, डॉ. ममता, त्रिपुरेश्वर मिश्रा और डॉ. अंजेश ने भी अपने विचार रखे। मौके पर बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद, छात्र और हिंदी प्रेमी मौजूद थे।