ज्योति पर्व दीपावली पर लोगों ने सूरन की सब्जी और चोखा खाकर परम्परा निभाया

वाराणसी,20 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सोमवार को ज्योतिपर्व दीपावली पूरे उत्साह और धूमधड़ाके के साथ मनाई जा रही है। पर्व पर लोगों ने विविध पकवानों और मिठाइयों के साथ परम्परानुसार सूरन की सब्जी या चोखा खाने की परम्परा भी निभाई। सनातनी परिवारों में महिलाओं ने पारम्परिक तरीके से सूरन की सब्जी और अन्य व्यजंन बनाए। इसके बाद परिजनों ने भी इसे आस्था और उत्साह के साथ खाया। दरअसल दीपावली पर्व पर सूरन की सब्जी खाना अनिवार्य होता है।

साहित्यकार और हास्य कवि श्याम नारायण लाल (धकाधक बनारसी) बताते है कि सूरन ऐसी जड़ वाली सब्जी है जो अगर खेत की मिट्टी से निकालते समय थोड़ी भी रह जाए, तो उससे नया पौधा उग आता है। इस सब्जी की यही विशेषता जीवन में निरंतरता और बढ़ोतरी का संदेश देती है। इसी कारण इसे खुशहाली और संपन्नता का प्रतीक माना गया है। पर्व के दिन माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। लोग धन, सुख और सफलता की कामना करते हैं। इस दिन बनाए जाने वाले पकवानों में सूरन को इसी लिए खास महत्व दिया गया है। स्वास्थ्य के नजरिए से भी यह इस मौसम में काफी फायदेमंद है। आयुर्वेद विशेषज्ञों का भी मानना है कि शरद ऋतु के आगमन और ऋतु संधि काल में सूरन की सब्जी के सेवन से मंदाग्नि शांत रहती है। सूरन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और अनेक रोगों से बचाव में सहायक होता है।

बताते चले कि ज्योतिपर्व पर सूरन फुटकर बाजार में 80—100 रूपये किग्रा तक बिका। लोगों ने परम्परा निभाने के लिए इसकी जमकर खरीददारी की। बाजार में देशी सूरन के साथ पहाड़ी और महाराष्ट्र का सूरन उपलब्ध रहा। ज्यादातर लोगों ने देशी सूरन के बजाय पहाड़ी सूरन को ही तवज्जो दिया। बाजार में बिहार का सूरन भी जमकर बिका।