कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. चंद्र प्रकाश ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज का दिन अत्यंत विशेष है, क्योंकि विजयदशमी का पावन पर्व, संघ स्थापना दिवस और संघ का शताब्दी वर्ष, तीनों का उत्सव एक साथ मनाया जा रहा है। उन्होंने संघ की स्थापना, संघर्ष और विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ व्यक्ति निर्माण से शुरू होकर समाज संगठन की दिशा में बढ़ा और आज राष्ट्र निर्माण की एक सशक्त धारा बन चुका है।
डॉ. चंद्र प्रकाश ने शक्ति पूजन और शस्त्र पूजन की परंपरा को स्पष्ट करते हुए कहा कि शक्ति के बिना शस्त्र और शस्त्र के बिना शक्ति अधूरी है। शस्त्र पूजन समर्पण का प्रतीक है और शक्ति पूरे ब्रह्मांड की आधारशिला है। उन्होंने संघ के पंच परिवर्तन विषयों — सामाजिक समरसता, स्व का भाव, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य — पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि इन्हें जीवन में अपनाया जाए तो राष्ट्र को परम वैभव की ओर ले जाया जा सकता है।
उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे पंच परिवर्तन के इन विषयों को अपने आचरण और व्यवहार में अपनाकर निरंतर कार्य करने का संकल्प लें और राष्ट्र को उन्नति की दिशा में ले जाने में अपनी भूमिका निभाएं।
इस अवसर पर प्रांत प्रचारक संजय, प्रांत कार्यकारिणी सदस्य महीधर प्रसाद, प्रांत पर्यावरण संयोजक पवन कुमार, विभाग प्रचारक महेश्वर, जिला संघचालक अजय सूद और नगर संघचालक लोकेश सूद सहित संघ के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।