कागजों में नहीं धरातल पर चाहिए काम, मॉनिटरिंग के लिए सुझाए विशेषज्ञ के नाम-हाईकोर्ट

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने शपथ पत्र के जरिए जर्जर स्कूलों की मरम्मत को लेकर अदालत में जानकारी दी। महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि अधिक जर्जर स्कूलों की मरम्मत के लिए पांच लाख रुपये का बजट तय किया गया है और आगामी मार्च माह तक काम पूरा कर लिया जाएगा। वहीं शेष स्कूलों में मरम्मत का काम नवंबर, 2026 तक पूरा कर लेंगे। अदालत ने कहा कि पांच लाख रुपये में मरम्मत कैसे होगी, लाखों रुपए तो रंग-सफेदी में ही लग जाते हैं। ऐसा लगता है कि बिना परीक्षण किए सतही तौर पर यह राशि तय की गई है। इस पर महाधिवक्ता ने कहा कि जरूरत पड़ेगी तो और बजट जारी किया जाएगा। इसके अलावा स्कूलों के लिए कुल बजट का 11.46 फीसदी बजट स्वीकृत किया गया है। अदालत ने मरम्मत के काम के निरीक्षण का काम स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मंशा जताते हुए कहा कि ठेकेदार की गलती से घटनाएं होती हैं। ऐसे में पीडब्ल्यूडी से निरीक्षण कराने के बजाए स्वतंत्र एजेंसी से कराया जाना चाहिए। अदालत ने महाधिवक्ता को कहा कि आप काम करने की बात कह रहे हैं, लेकिन धरातल पर कुछ दिखाई नहीं दे रहा। आज भी टीन शेड के नीचे स्कूल संचालित हो रही हैं। सभी जिलों की स्कूलों की ग्रेडिंग तय हो ताकि, काम को लेकर प्राथमिकता तय हो सके। इस पर अदालत ने कहा कि फिलहाल फोकस सुरक्षा को लेकर है। अदालत मामले की मॉनिटरिंग कर रहा है। वहीं स्वतंत्र संस्था से रिपेयरिंग का निरीक्षण स्वतंत्र एजेंसी से कराने के संबंध में सरकार से निर्देश लेने पडेंगे। एजी ने कहा कि नवंबर माह में केन्द्र सरकार से भी पैसा जारी होगा और उन्हें रोडमैप पेश करने के लिए समय दिया जाए। इस पर अदालत ने मामले की सुनवाई 31 अक्टूबर को तय करते हुए सभी पक्षों को स्वतंत्र एजेंसी का नाम सुझाने को कहा है।