कैंप में मौजूद लोग सुंदर महिलाओं की तस्वीरें वाले फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट चलाते थे। उनका काम था अमेरिकी बुजुर्गों से दोस्ती कर भरोसा जीतना फिर निवेश या गिफ्ट कार्ड के नाम पर ठगी करवाना। अविनाश ने बताया कि मैंने एक महीने में 10 लोगों से बात की। उनमें से तीन से ठगी सफल हुई। जो टारगेट पूरा नहीं करता था। उसे करंट से झटके दिए जाते थे या भूखा रखा जाता था। भारत सरकार के एक स्पेशल ऑपरेशन के तहत म्यांमार-थाईलैंड सीमा से करीब 500 भारतीय युवाओं को छुड़ाया गया। जिनमें अविनाश भी शामिल था। उन्होंने बताया कि वहां सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, नाइजीरिया, इथियोपिया जैसे देशों के युवक भी ठगी करने पर मजबूर थे। अविनाश ने कहा कि हम सोच रहे थे कि विदेश जाकर पैसा कमाएंगे लेकिन हमें साइबर ठग बना दिया गया। हर दिन झूठ बोलना, धोखा देना और डर के साए में जीना हमारी दिनचर्या बन गई थी। यह आधुनिक गुलामी है। यह कहानी चेतावनी है उन युवाओं के लिए जो विदेश की चमक में सब कुछ दांव पर लगा देते हैं। क्योंकि कभी-कभी वहां ‘नौकरी’ नहीं, ‘नर्क’ इंतजार कर रहा होता है।