सीएम आयुष्मान बाल-संबल योजना अब बड़े मरीजों पर भी लागू

जोधपुर, 29 नवम्बर । राजस्थान हाईकोर्ट ने मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी दुर्लभ बीमारी से पीडि़त मरीजों के उपचार को लेकर आदेश दिया है। इसमें अंतरिम आदेश पारित करते हुए मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल संबल योजना-2024 की उम्र सीमा हटा दी है।

जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस अनुरूप सिंघी की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि अगला आदेश आने तक योजना की अनुच्छेद 5 की कंडीशन-1 सभी आयु वर्ग के लोगों पर लागू मानी जाएगी। सिर्फ 18 साल से कम उम्र के मरीजों तक सीमित नहीं रहेगी। स्वावलंबन फाउंडेशन की ओर से इस मुद्दे को लेकर याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता संस्था की तरफ से सीनियर एडवोकेट डॉ. सचिन आचार्य ने दलीलें रखीं। डॉ. आचार्य के साथ सहयोगी अधिवक्ता चयन बोथरा व सार्थक आसोपा ने भी याचिकाकर्ता संस्था की तरफ से पक्ष रखा। डॉ. आचार्य ने कोर्ट के सामने मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के मरीजों की पहचान, जांच, उपचार, नीतिगत खालीपन और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जुड़े पांच प्रमुख बिंदु रखे।

याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि राजस्थान में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और अन्य कई रेयर डिजीज के लिए बेसिक डायग्नोसिस भी मुश्किल है, क्योंकि एम्स जोधपुर स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में जीन टेस्टिंग नहीं हो रही। मरीजों को महंगे निजी लैब्स पर निर्भर रहना पड़ता है। निजी लैब पर निर्भरता के कारण रिपोर्ट आने में देरी होती है। इससे इलाज और अधिक लेट हो जाता है, जबकि बीमारी प्रोग्रेसिव होने के कारण हर महीने स्थिति बिगड़ती जाती है। उपचार के स्तर पर कोर्ट को बताया गया कि पूरे राजस्थान में फिलहाल केवल एम्स जोधपुर एक फंक्शनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस है। जहां दूर-दराज के मरीजों के लिए पहुंचना भी अपने आप में चुनौती है। जेके लोन हॉस्पिटल को रेयर डिजीज के लिए नोडल बनाकर रखा गया है, लेकिन व्यावहारिक रूप से वहां इलाज की बजाय विभागीय/प्रशासनिक काम ही हो रहा है। इसके अलावा मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल संबल स्कीम के तहत केवल 63 सूचीबद्ध रेयर डिजीज का इलाज कवर हैं।

हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश

बेंच ने रिकॉर्ड और दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट कहा कि अदालत इस मुद्दे को लेकर बेहद चिंतित और व्याकुल हैं। कोर्ट ने फिलहाल मेरिट पर विस्तृत टिप्पणी टालते हुए एक अहम अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया कि अगला आदेश आने तक मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल संबल योजना 2024 की क्लॉज 5 की कंडीशन-1 को इस तरह पढ़ा जाए कि वह सिर्फ 18 वर्ष से कम नहीं, बल्कि सभी आयु वर्ग के लोगों/मरीजों पर लागू होगी। यानी, अब जब तक आगे कोई संशोधित आदेश नहीं आता, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और अन्य सूचीबद्ध दुर्लभ बीमारियों से पीडि़त वयस्क मरीज भी उसी तरह की आर्थिक व उपचार सहायता पाने के हकदार होंगे। जैसी अभी तक केवल नाबालिगों को मिल रही थी। कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा पेश एक्शन प्लान और याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए अन्य बिंदुओं पर विस्तृत सुनवाई के लिए समय दिया। शेष मुद्दों पर निर्देश लेने के लिए एएजी की मांग पर कोर्ट ने समय मंजूर किया। इसलिए मामले को अगली सुनवाई के लिए 16 दिसंबर को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।