डॉ. कृष्ण गोपाल गुरुवार को विज्ञान भवन में आयोजित गुरु तेग बहादुर जी महाराज की शहीदी के 350वें वर्ष को समर्पित नौवीं पातशाही शहीदी समागम के मौके पर मुख्य वक्ता के तौर पर बोल रहे थे। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में पंजाब एंड सिंघ बैंक के पूर्व अध्यक्ष डॉ. चरन सिंह के साथ दिल्ली उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश तलवंत सिंह मौजूद रहे।
गुरुतेग बहादुर की शहादत की कहानी सुनाते हुए डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि गुरुतेग बहादुर ने औरंगजेब के आगे घुटने नहीं टेके। उनके सामने उनके तीन शिष्यों को मारा गया औऱ वे शांत स्मरण कर रहे थे। फिर उन्हें भी मतांतरण करने को कहा लेकिन शहादत चुनी। विश्व के इतिहास में ऐसी घटना दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि गुरु का जीवन बलिदान विश्व की आंखे खोलने के लिए है। पूरी मानवता के कल्याण के लिए है जो अद्वितीय। उन्होंने मानवीय जीवन के मूल्यों की रक्षा के लिए अपने जीवन की शहादत दी। गुरु की घोषणा सनातन है। मानवता के कल्याण के लिए अपने शरीर का बलिदान देना ही इस देश की परंपरा रही है। विश्व के लिए यह एक बड़ा संदेश है। उन्होंने कहा कि गुरु तेगबहादुर की परंपरा अध्यात्मिक बोध जगाने की परंपरा है। उनका संदेश समाज को भयमुक्त करता है, डराता नहीं है। उन्होंने कहा कि गुरुतेग बहादुर के जीवन से पूरे विश्व को उनके जीवन से सीख लेनी चाहिए।
इस मौके पर पंजाब एंड सिंघ बैंक के पूर्व अध्यक्ष डॉ. चरन सिंह ने मांग रखी कि विश्व को गुरु तेगबहादुर के शहादत दिवस को विश्व अंतरधार्मिक सद्भाव दिवस के रूप में घोषित किया जाना चाहिए, क्योंकि गुरु जी की शहादत अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि गुरु की सीख को अपनाते हुए एकजुट होकर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। यह तभी संभव को होगा जब हम चुनौतियों को स्वीकार कर एकजुट होकर विकसित राष्ट्र का संकल्प लें और उस दिशा में काम करें।