वहां मौजूदा मुलभूत सुविधाओं की जानकारी लेते हुए परिजनों को हिम्मत और ढांढस बंधाया। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की जिम्मेवारी सिर्फ और सिर्फ झारखंड के अबुआ सरकार की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने कुरमी-कुड़मी को आदिवासी बनाने संबंधित मामले को केन्द्र सरकार को नहीं भेजा हाेता तो झारखंड में आज आदिवासी समाज का आंदोलन नहीं होता। आंदोलन नहीं होता तो इस तरह की घटना भी नहीं होती।
मुंडा ने राज्य सरकार से जल्द सभी मृतक परिवारों को 10-10 लाख रुपया मुआवजा की राशि देने। और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। इसके अलावे उन्होंने घायलों को दो-दो लाख रुपये मुआवजा देने पर जोर दिया।
मौके पर मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने कहा कि इस घटना का जितना भी निंदा की जाए वह कम है। झारखंड के अबुआ सरकार के रहते हुए भी पीड़ित आदिवासी परिवार से मिलने अबतक सरकार के काेई आधिकारी जानकारी लेने नहीं पहुंचे। मरनेवालों की जानकारी भी लेना उचित नहीं समझ रहें हैं।
केन्द्रीय सरना समिति के प्रधान महासचिव अशोक मुंडा ने कहा कि दुर्घटना में शामिल मृतक के परिवार एवं सभी घायलों के परिवार से मिलकर खाना, पानी, फल एवं आर्थिक व्यवस्था दी गई है।
साथ ही सभी घायलों के परिजनों से कहा गया है कि जो दवा रिम्स में उपलब्ध नहीं है। जरूरत पडने पर सरना समिति उपलब्ध कराएगी। जबतक सभी घायलों का ईलाज रिम्स में चलेगा तब तक केन्द्रीय सरना समिति की ओर से घायलों को मूलभूत सुविधाएं मिलती रहेगी। मुलाकात करनेवालों में मुख्य रूप से बबलू मुंडा, मुख्य पहान जगलाल पहान, प्रधान महासचिव अशोक मुंडा, मुकेश मुंडा, आशीष मुंडा, संतोष मुंडा, अंजन मुंडा, संदीप मंडल, रवि सागर, पवन लोहार, राजीव रंजन, रजत, बौनी सहित अन्य लोग मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि गुरुवार काे बुंडू में सड़क दुघर्टना में चार लाेगाें की माैत हाे गयी थी। जबकि पंद्रह लाेग घायल हाे गये थे।