उन्होंने कहा कि सत्संग मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा वरदान है। इससे बुरे विचारों का नाश होता है। भगवत भजन और धर्म के बिना जीवन का कोई मूल्य नहीं है। उन्होंने समझाया कि धर्म और अधर्म सदा साथ रहते हैं, परंतु मनुष्य का कल्याण इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस मार्ग का चुनाव करता है।
उन्होंने जैसे ही अयोध्या में प्रभु श्रीराम के अवतरण का प्रसंग सुनाया, पूरा पंडाल जय श्रीराम के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। भगवान के जन्मोत्सव पर महिलाओं ने पारंपरिक सोहर गीत गाकर ऐसा उल्लासपूर्ण वातावरण बना दिया कि हर भक्त की आंखें भक्ति भाव से नम हो उठीं। कार्यक्रम में रवि प्रकाश तिवारी, चिंतामणि श्रीवास्तव, जंगबहादुर सिंह, राजकुमार त्रिपाठी, श्रीपति उपाध्याय, बिजेंद्र प्रताप सिंह, अवधेश सिंह, नर्वदेश्वर तिवारी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।