फोम के ढेर खुली वायरिंग, बंद पड़ी मशीनें, अशोका फोम में हर कदम पर खतरा

जांच में पता चला कि यह इमारत भूतल से लेकर पांचवें तल तक खड़ी है, लेकिन सबसे ऊपर का तल पूरी तरह अवैध बनाया गया है।

सबसे बड़ी लापरवाही

20 मीटर ऊँची बिल्डिंग में सिर्फ एक ही स्टेयरकेस जिसकी डैड-एंड दूरी 57 मीटर निकली, जबकि नियम इससे काफी कम की अनुमति देते हैं। जो दूसरी सीढ़ी बनाई गई है, उसकी चौड़ाई मानकों के मुताबिक नहीं और ऊपर से फोम के गद्दों व ज्वलनशील सामान से रास्ता पटा पड़ा है।

यानी आग लगे तो नीचे उतरने की जगह भी नहीं मिलेगी। वही स्टेयरकेस के पास खुली बिजली की वायरिंग, पैनल भी वहीं।

अग्निशमन यंत्र तो लगे हैं, लेकिन सब मतलब दिखावे भर के।

भवन में न फायर टैंक, न मानक पंप, जो पंप लगे भी हैं वे चालू नहीं पाए गए।

हर तल पर फोम के ढेर, निकासी रास्ते तक बंद

गोदाम के हर तल पर फोम और गद्दे बिजली की वायरिंग के ठीक पास रखे मिले। निकास मार्ग तक ज्वलनशील सामग्री से बाधित मिले सीधी भाषा में कहें तो आग लगे तो बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं।

नक्शा कहाँ है? NOC का क्या हुआ?

उधर अग्निशमन विभाग ने सभी दस्तावेज मांगे हैं अग्निशमन विभाग ने पूछा है यदि भवन को फायर NOC मिली है तो उसकी प्रति दिखाएं,साथ ही बीडीए का पास नक्शा, बिजली सुरक्षा प्रमाण पत्र और बाकी दस्तावेज तुरंत मुहैया कराएं।

भवन घोषित—संवेदनशील और असुरक्षित

अग्निशमन विभाग ने साफ कहा है कि यह भवन अग्निसुरक्षा और जीवरक्षा दोनों के लिए बेहद असुरक्षित है।कभी भी आग लगने पर भारी जानमाल के नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी मनु शर्मा ने स्पष्ट कहा—

“मानक के विपरीत चलने वाले सभी भवनों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। अग्निसुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ विभाग जल्द ही कड़ी कार्रवाई करेगा