शहर में करीब 100 से ज्यादा निजी बसों के न चलने से स्थिति और गंभीर हो गई। सुबह से ही शहर के विभिन्न बस स्टॉप और चौकों पर यात्रियों की लंबी कतारें दिखाई दीं। कई लोग घंटों तक बसों का इंतजार करते रहे, लेकिन निजी बसें न चलने के कारण उन्हें सरकारी बसों का सहारा लेना पड़ा। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की बसों में यात्रियों की भीड़ बढ़ गई। कई बसों में तो यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा। वहीं, कुछ लोगों को मजबूरन पैदल ही अपने दफ्तरों और स्कूलों तक पहुंचना पड़ा।
परिवहन निगम ने जनता को राहत देने के लिए अतिरिक्त बसें भी चलाईं। एचआरटीसी के चालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शहर में जहां यात्रियों की भीड़ दिखाई दे, वहां बस रोककर यात्रियों को बिठाएं ताकि लोगों को अधिक परेशानी न हो।
निजी बस चालक-परिचालक संघ के आह्वान पर यह हड़ताल शुरू की गई है। संघ का कहना है कि 40 किलोमीटर से अधिक दूरी से आने वाली एचआरटीसी और निजी बसों को शिमला शहर और ओल्ड बस स्टैंड तक प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनका आरोप है कि इन बड़ी बसों के शहर में प्रवेश से लगातार जाम की स्थिति बन रही है और स्थानीय निजी बसों के रूट प्रभावित हो रहे हैं। इससे निजी बस ऑपरेटरों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
संघ के महासचिव अखिल गुप्ता ने बताया कि 12 अक्टूबर को परिवहन विभाग और एचआरटीसी अधिकारियों के साथ हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि शहर में 40 किलोमीटर से अधिक दूरी से आने वाली बसों के प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इसी कारण निजी बस चालक-परिचालक संघ ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का फैसला लिया है।
उधर, आरटीओ शिमला अनिल शर्मा ने बताया कि निजी बस ऑपरेटरों की मांगों को लेकर एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक से बातचीत की गई है और 40 किलोमीटर से बाहर से आने वाली बसों के प्रवेश पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूल बसों में सवारियां बैठाने के मुद्दे पर भी बात हुई है। आरटीओ ने उम्मीद जताई कि जल्द ही दोनों पक्षों के बीच वार्ता से इस विवाद का समाधान हो जाएगा।
फिलहाल, निजी बसों की हड़ताल जारी है और जब तक ऑपरेटरों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक शहर में यातायात व्यवस्था प्रभावित रहने की संभावना है।