पठानिया ने इस मौके पर एसजेवीएन की सराहना करते हुए कहा कि इसका उद्भव हिमाचल प्रदेश में हुआ था और उस समय के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस निगम में इक्विटी के रूप में योगदान किया था। आज एसजेवीएन एक नवरत्न कंपनी के रूप में कार्य कर रही है और विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में इसका योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हाइड्रो एनर्जी की अपार संभावनाएं हैं और हिमाचल प्रदेश इस क्षेत्र में देशभर के लिए मार्गदर्शक बन चुका है। प्रदेश में सालाना करीब साढ़े 12 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जबकि हमारी कुल क्षमता लगभग 30 हजार मेगावाट है।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि अगर हम प्रकृति का संतुलित तरीके से दोहन नहीं करेंगे तो इसका खामियाजा वर्तमान और भविष्य की पीढ़ी को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) एक गंभीर मुद्दा बन चुका है, जिस पर वैश्विक स्तर पर चर्चा हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित देशों के योगदान ने जलवायु परिवर्तन में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन विकासशील देशों में अब भी विकास बहुत पीछे है। प्रदेश में आए दिन आपदाओं में वृद्धि हो रही है, जो जलवायु परिवर्तन का परिणाम है।
पठानिया ने बताया कि राज्य और देश को नॉन कन्वेंशनल एनर्जी सोर्स की दिशा में आगे बढ़ना होगा, खासकर ग्रीन एनर्जी की दिशा में। उन्होंने सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य ऊर्जा विकल्पों के विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि हमारे देश में वेस्ट इंडस्ट्री पर अभी तक उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जितना कि इसे आवश्यकता है, जो चिंताजनक है। उन्होंने सरकार और आम नागरिकों से अपील की कि वे इस दिशा में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
इस कार्यक्रम में निदेशक पर्सनल एसजेवीएन अजय शर्मा ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता में प्रदेश के 12 जिलों से 2 लाख 23 हजार 917 बच्चों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में लगभग 4825 स्कूलों ने सहभागिता की और प्रतियोगिता की दोनों श्रेणियों से 55-55 प्रतिभागियों का चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 20 वर्षों से यह प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है और इस दौरान 20 लाख से अधिक बच्चों को ऊर्जा संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया गया है।