ने 20 हजार करोड़ की सार्वजनिक परियोजनाओं को गिराने के आदेश को वापस ले लिया है। चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने दो-एक के बहुमत से सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को पलट दिया।
उच्चतम न्यायालय
के मई के फैसले में लगभग 20 हजार करोड़ की सार्वजनिक परियोजनाओं को गिराने का आदेश दिया था, क्योंकि उन्हें जुर्माना भरकर बाद में पर्यावरणीय मंजूरी दी गई थी। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया और कर्नाटक सरकार ने उच्चतम न्यायालय
से इस फैसले को वापस लेने के लिए अपील की थी। याचिका में कहा गया था कि अगर मई का फैसला लागू हुआ तो कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को रोकना और ध्वस्त करना पड़ेगा।
चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर मई का फैसला कायम रहता, तो ओडिशा में बन रहे एम्स, कर्नाटक के ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट और कई अन्य बड़े सार्वजनिक प्रोजेक्ट्स को गिराना पड़ता, जिन पर जनता का हजारों करोड़ रुपये खर्च हो चुका है। ऐसे प्रोजेक्ट्स को ध्वस्त करने से न केवल भारी आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि बड़ी मात्रा में प्रदूषण भी फैल सकता है।
बहुमत के इस फैसले से जस्टिस उज्जवल भुइयां ने असहमति जताई। जस्टिस भुइयां ने कहा कि पर्यावरण कानूनों को नजर अंदाज कर देना ठीक नहीं है। अगर पुराने फैसले की समीक्षा की गई तो यह पर्यावरण न्याय शास्त्र के खिलाफ है।