पोस्टमार्टम प्रकिया पूरी होने के बाद शुक्रवार देर शाम को राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। पूरे गांव में मातम का माहौल बना हुआ है। हर तरफ विक्रम अमर रहे नारो के साथ गूंज उठा पूरा गांव। पूरे गांव वालों की आंखें नम थी। विक्रम का पिता काफी समय से बीमार चल रहा है। पूरे गांव ने नम आंखों से विक्रम को विदाई दी।
आइटीबीपी जवान 27 वर्षीय विक्रम को अंतिम सलामी देने के लिए पटियाला से बटालियन की एक टुकड़ी आई थी। विक्रम की अकास्मिक मौत होने पर आस-पास के गांवों के लोग श्रद्धाजंलि देने के लिए पहुंचे। बलिदानी विक्रम अमर रहे के नारों के साथ उसका शव श्मशान घाट ले जाया गया। जहां उसके दादा प्रहलाद जोकि भूतपूर्व फौजी थे, उनके द्वारा पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धाजंलि दी गई। आइटीबीपी के इंसपेक्टर ने विक्रम के पिता सुरेश को तिरंगा झंडा सम्मान के साथ हाथों में सौंपा और तिरंगा झंडा की महत्ता को बताया। बलिदानी विक्रम के परिजनों ने बताया कि विक्रम की जम्मू-कश्मीर में लेह में ड्यूटी थी और दो नवंबर को छुट्टी आया था और उसको 24 नवंबर को वापस जाना था।
विक्रम पटियाला में 12वीं कक्षा पास करने के बाद वर्ष 2019 में आइटीबीपी में भर्ती हुआ था। अब वो सिपाही पद पर कार्यरत था। जिला करनाल के असंध में एक फौजी को छोडऩे के बाद उसके ही गांव के किस्मत के साथ गांव गुरूसर लौट रहा था तो नींद की झपकी आने के कारण कार का एक्सीडेंट हो गया। उन्होंने बताया कि विक्रम की दो बहनें हैं और उसकी दो साल पहले शादी हुई थी।
ग्रामीण मास्टर बलबीर सिंह व परिजनों ने बताया कि आईटीबीपी जवान विक्रम की अचानक मौत होना पूरे गांव के लिए सदमे की बात है। उन्होंने कहा कि उसको श्रद्धाजंलि देने के लिए आसपास के गांवों के लोग पहुंचे हैं।