पूवर्ती में हिड़मा का खौफ इलाके में इतना गहरा था, कि गांव के युवा और यहां तक कि उसकी मां पूंजी ने भी पहले उसे पहचानने से साफ इंकार कर दिया। मानो हर कोई इस खौफनाक नाम से अपना संबंध तोड़ लेना चाहता हो । बाद में, फुस-फुसाहटों के बीच ग्रामीणों ने दबी हुई आवाज़ में पुष्टि की यह वही हिड़मा है। उन्हें इस बात पर भी हैरानी थी कि हिड़मा इतनी आसान मौत कैसे मारा जा सकता है। हिड़मा के गृह ग्राम पूवर्ती के ग्रामीणों का यह भी मानना था कि हिड़मा को समय रहते आत्मसमर्पण कर देना चाहिए था, क्योंकि अब सरकार का दबाव लगातार बढ़ रहा था।
उल्लेखनीय है कि एक सप्ताह पहले ही, छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पूवर्ती आकर ग्रामीणों से शांति और आत्मसमर्पण की अपील की थी। मां ने भी बेटे को घर लौट आने को कहा, पर माओवादी हिंसा में अंधे हो चुके बेटे ने मां की बात नहीं मानी और बेटा नहीं उसका शव गांव आएगा।