सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था जनवरी 2026 से सभी वोकेशनल ट्रेनर्स के लिए लागू होगी। संबंधित स्कूलों के वार्षिक शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार इन छुट्टियों का निर्धारण किया जाएगा, बशर्ते अवकाश अवधि में स्कूलों में कोई व्यावसायिक गतिविधि न चल रही हो।
जारी दिशानिर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ट्रेनर्स को छुट्टियों के दौरान भी यदि जरूरत पड़ती है तो ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग, स्टूडेंट असेसमेंट, वर्कशॉप, मीटिंग्स या किसी भी जरूरी कार्य में भाग लेना होगा। ऐसे कार्यों के लिए किसी भी अतिरिक्त अवकाश या पारिश्रमिक का दावा मान्य नहीं होगा। वोकेशनल ट्रेनर्स को साल में मिलने वाली 12 कैजुअल लीव और 6 मेडिकल लीव पहले की तरह मिलती रहेंगी। इसके अलावा मातृत्व अवकाश का लाभ भी मातृत्व अधिनियम के तहत मिलेगा।
राज्य परियोजना निदेशक राजेश शर्मा हिमाचल प्रदेश ने सभी वीटीपी को निर्देश दिए हैं कि संशोधित अवकाश व्यवस्था की जानकारी संबंधित स्कूल प्रमुखों को तत्काल उपलब्ध करवाई जाए और इसे अनुबंध की लीव क्लॉज में भी शामिल किया जाए। वहीं हिमाचल प्रदेश व्यावसायिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी ढटवालिया और महासचिव प्रवीण मेघटा ने इस फैसले पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर राजेश शर्मा का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम प्रदेश में वोकेशनल शिक्षा व्यवस्था को अधिक संगठित और स्कूल शेड्यूल के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।