इधर पांच अगस्त को खीर गंगा में के जल सैलाब से धराली – हर्षिल क्षेत्र में भी गंगोत्री धाम यात्रा समाप्त होते ही पर्यटकों की चहलकदमी कम हुई है। भागीरथी घाटी में तीन माह पहले आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद अब भी गांव के हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं।
गौरतलब है कि ऐसे में अगर जनपद में तीर्थाटन के साथ पर्यटन को जोड़ा जाए, तो शीतकालीन चारधाम यात्रा परवान चढ़ सकती है। वर्ष 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शीतकालीन चारधाम यात्रा शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन यह योजना उम्मीद के अनुरूप परवान नहीं चढ़ सकी।
चारधाम यात्रा से जुड़े कारोबारियों और तीर्थपुरोहितों का कहना है कि तीर्थाटन के साथ पर्यटन को जोड़ने से यह योजना आगे बढ़ सकती है। अगर सरकार शीतकालीन चारधाम यात्रा शुरू करती है, तो यहां स्थानीय लोगों को 12 माह रोजगार मिल सकता है। प्रदेश की आर्थिकी तीर्थाटन और पर्यटन पर टिकी हुई है।
खासतौर पर यात्रा सीजन में चारधाम वाले जनपद उत्तरकाशी, में श्रद्धालुओं की आमद से न केवल इन जनपदों बल्कि हरिद्वार, देहरादून और ऋषिकेश आदि बड़े शहरों के छोटे-बड़े कारोबारियों को लाभ मिलता है, लेकिन धामों में कपाटबंदी के साथ ही यात्रा पड़ावों पर सन्नाटा पसर जाता है, जबकि धामों के केवल कपाट बंद होते हैं। मां यमुना और गंगा के दर्शन बंद नहीं होते हैं।
इधर गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि शीतकालीन यात्रा अच्छी चलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि आज भी मां गंगा के शीतकालीन प्रवास मुखवा में पांच सौ श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। उन्होंने कहा कि शीतकालीन प्रवास मुखवा में मां गंगा जी के दर्शन करने से उतना ही फल मिलता है जितना गंगोत्री धाम में ।