मनरेगा को लेकर केंद्र रहा अडिग, तो करेंगे व्‍यापक आंदोलन : विधायक सोमेश सोरेन

पूर्वी सिंहभूम, 27 दिसंबर । केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने की कथित पहल के विरोध में शनिवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से जिला मुख्यालय पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। धरना स्थल पर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जुटी, जहां केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने इस कदम को गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण जनता के अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया।

धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए घाटशिला विधायक सोमेश सोरेन ने केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार मनरेगा के नाम परिवर्तन के अपने फैसले पर अड़ी रही, तो झामुमो सड़क से लेकर सदन तक व्यापक, लोकतांत्रिक और निर्णायक आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण गरीबों की आजीविका, आत्मसम्मान और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी हुई योजना है। इसके नाम या स्वरूप से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को झामुमो किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगा।

झामुमो के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल साड़ंगी ने कहा कि यह मामला केवल योजना के नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गरीबों और मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है। उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना ने देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों को सम्मान के साथ रोजगार उपलब्ध कराया है और यह योजना महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी होने के कारण लोगों के बीच गहरा भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व रखती है। नाम परिवर्तन से योजना की मूल भावना और इसकी पहचान को ठेस पहुंचेगी।

धरना स्थल पर मौजूद झामुमो नेताओं मोहन कर्मकार, प्रमोद लाल समेत अन्य वक्ताओं ने भी केंद्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलने का निर्णय वापस नहीं लिया, तो गांव से लेकर जिला, राज्य और दिल्ली तक उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस आंदोलन से उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी।

इस धरना-प्रदर्शन में झामुमो की पूर्व सांसद सुमन महतो, राजू गिरी, सुनील महतो, सागेन पूर्ति, मोहन कर्मकार, नगर संयोजक बागराई मार्डी, प्रमोद लाल, नीता सरकार सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता एवं सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में केंद्र सरकार के फैसले का विरोध करते हुए आंदोलन को और तेज करने का संकल्प लिया।————–