खराब बीज बेचने पर विक्रेता पर लगाया 65 हजार रुपये हर्जाना

आयोग में परिवादी की ओर से कहा गया कि उसने फरवरी 2022 में विपक्षी से वाटरमेलन ब्लैक टाइगर के पांच पैकेट 7 हजार रुपये में तीन बीघा जमीन में तरबूज की खेती करने के लिए खरीदे। उसने इन बीजों से खेत में बुवाई की जिस पर 82,850 रुपये खर्च हुआ। इसके अलावा उसने फसल को दीमक व अन्य से बचाने के लिए स्प्रे भी किया। यह फसल तीन महीने में पक कर तैयार होनी थी, लेकिन कुछ बीज ही अंकुरित हुए। परिवादी ने जब पता किया तो केवल 6 फीसदी बीज ही अंकुरित होने योग्य पाए गए। परिवादी ने इसे उपभोक्ता आयोग में चुनौती देते हुए कहा कि विक्रेता ने उसे घटिया किस्म के बीच बेचे हैं और इसके चलते उसकी तरबूज की फसल खराब हुई। ऐसा करना ग्राहक के साथ अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस है। इसलिए उसे विक्रेता से फसल खराब होने पर हर्जा-खर्चा दिलवाया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए आयोग ने अपने फैसले में माना कि घटिया बीज बेचने से ही उसकी फसल खराब हुई है, इसलिए विपक्षी उसे हुए नुकसान व हर्जे-खर्चे के लिए जिम्मेदार है।