याचिकाओं में अधिवक्ता लक्ष्मीकांत मालपुरा ने अदालत को बताया कि पंचायती राज विभाग ने गत 10 जनवरी को पंचायती राज अधिनियम की धारा 101 के तहत पंचायती राज संस्थाओं के पुनर्सीमांकन, नवसृजन और पुनर्गठन के लिए जिला कलेक्टर से प्रस्ताव मांगे थे। राज्य सरकार ने धौलपुर व करौली जिला कलेक्टर की ओर से भेजे प्रस्तावों को नहीं मानते हुए गत 20 नवंबर को मनमाने तरीके से संबंधित ग्राम पंचायतों के मुख्यालय बदल दिए। इसके अलावा करौली जिले से जुडे मामले में पंचायत मुख्यालय करीब 14 किलोमीटर दूर कर दिया, जबकि नियमानुसार यह दूरी अधिकतम पांच किलोमीटर से अधिक नहीं हो सकती। याचिकाओं में कहा गया कि इन ग्राम पंचायत मुख्यालयों में पहले से ही राज्य सरकार से सभी कार्यालय मौजूद हैं। इसके बावजूद भी सरकार ने मनमाने तरीके से अधिसूचना जारी कर इनके मुख्यालय बदल दिए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।