प्रदीप यादव ने यह मामला ध्यानाकर्षण की सूचना के तहत उठाया था। जवाब में मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के पास झारखंड में थैलिसिमिया और सिकल सेल जैसी बीमारियों से पीड़ित बच्चों का कोई सर्वे रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। लेकिन सरकार ऐसे पीड़ित बच्चों का सर्वे कराएगी और मरीजों के हित में सदर अस्पताल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध कराएगी।
प्रदीप यादव ने मंत्री से ऐसे बच्चों को रक्तरदान करनेवालों के लिए आई कार्ड बनाने और ऐप बनाने की भी मांग की। उन्होंने बताया कि थैलिसिमिया और सिकल सेल जैसी बीमारियों से पीड़ित बच्चों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए कर्नाटक 20 लाख, बिहार 15 और अरूणाचल प्रदेश में 15 लाख रुपये की सहायता राशि देती है, लेकिन झारखंड में ऐसी सुविधा नहीं है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार कोल इंडिया के सहयोग से इन बीमारियों के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता करती है।
प्रदीप यादव ने मंत्री से झारखंड के थैलिसिमिया से पीड़ित बच्चों को रक्तदान से संबंधित व्यवस्था के बारे में पूछा इसपर मंत्री ने कहा कि यह सुविधा राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में मौजूद है। मंत्री के इस जवाब पर प्रदीप यादव ने नाराजगी प्रकट की और मंत्री पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने मंत्री से एक माह में सभी प्रमंडलों में ऐसी व्यवस्था करने की मांग की।
प्रदीप यादव ने कहा कि थैलिसिमिया का इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट से ही संभव है। इसपर मंत्री ने कहा कि वे आउट ऑफ वे जाकर इसपर काम करेंगे।
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