जांजगीर–चांपा में आयोजित एक रैली के दौरान जेपी नड्डा ने झीरम घाटी कांड को लेकर टिप्पणी की थी कि इस हमले में कांग्रेस से जुड़े लोग ही नक्सलियों के संपर्क में थे। इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई। पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने आज बुधवार काे सोशल मीडिया के माध्यम से पलटवार करते हुए कहा कि यह बयान न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि शहीदों के बलिदान का अपमान भी है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नड्डा के पास झीरम हमले से जुड़े ठोस सबूत हैं, तो इतने वर्षों बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
सिंहदेव ने कहा कि झीरम हमले के समय प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और सुरक्षा व्यवस्था उसी के अधीन थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस वक्त की सरकार अपने नेताओं और नागरिकों की सुरक्षा करने में असफल रही। ऐसे में आज आरोप-प्रत्यारोप करना जिम्मेदार राजनीति नहीं कही जा सकती।
उन्होंने यह भी कहा कि इतनी भयावह घटना को राजनीतिक बयानबाजी का विषय बनाना और सच्चाई जानने का दावा करने के बावजूद चुप रहना, न्याय की भावना के खिलाफ है। सिंहदेव ने दो टूक कहा कि या तो सबूत देश के सामने लाए जाएं, या फिर झीरम के शहीदों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से माफी मांगी जाए।
उल्लेखनीय है कि झीरम घाटी में जिस परिवर्तन यात्रा पर नक्सली हमला हुआ था, उसके संयोजक स्वयं सिंहदेव थे। हमले से कुछ समय पहले वे उसी मार्ग से होकर आगे के कार्यक्रम की तैयारियों के लिए निकल चुके थे। बाद में उन्हें झीरम घाटी में हुए भीषण नक्सली हमले की सूचना मिली थी, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था।
सिंहदेव ने स्पष्ट कहा कि झीरम घाटी कांड का सच सामने आना जरूरी है, लेकिन शहीदों के नाम पर राजनीति को छत्तीसगढ़ कभी स्वीकार नहीं करेगा।