एनपीयू में परीक्षा और परिणाम में बड़े पैमाने पर विलंब से छात्र परेशान

यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को सत्र नियमित करने, परीक्षाएं समय पर आयोजित करने और विद्यार्थियों को परीक्षा के 180 दिनों के भीतर डिग्री उपलब्ध कराने का स्पष्ट आदेश जारी किया है। आयोग का कहना है कि परीक्षाओं और डिग्री में विलंब से छात्रों के रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं। उच्च शिक्षा में प्रवेश से जुड़े कई अवसर भी हाथ से निकल जाते हैं।

एनपीयू में सत्रों की स्थिति बेहद चिंताजनक

पीजी सत्र 2022-24: फाइनल सेमेस्टर का रिजल्ट अब तक घोषित नहीं हो सका है। पीजी सत्र 2023-25: केवल दो सेमेस्टर की ही परीक्षा आयोजित हो पाई है।

स्नातक सत्र 2022-26: तीन सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित हुई हैं।

स्नातक सत्र 2023-27: मात्र दो सेमेस्टर की परीक्षा संपन्न हुई है।

पीजी सत्र 2024-26: सत्र को ड्रॉप कर दिया गया और पीजी 2025-27 का नामांकन लिया गया, लेकिन अब तक एक भी सेमेस्टर की परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी है।

प्रोफेशनल कोर्स की स्थिति भी गंभीर

बीएड समेत व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी अव्यवस्था से अछूते नहीं हैं।

बीएड सत्र 2023-25: तीन सेमेस्टर की परीक्षा हो पाई है।

बीएड सत्र 2024-26: केवल एक सेमेस्टर की परीक्षा आयोजित हुई है।

विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर

लगातार विलंब के कारण हजारों विद्यार्थी परिणाम और डिग्री का इंतजार कर रहे हैं। न तो समय पर परीक्षाएं आयोजित हो रही हैं ना ही परिणाम तय समय पर जारी हो पा रहे हैं और न ही समय पर डिग्री उपलब्ध हो रही है। इससे विद्यार्थियों को रोजगार, उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में अपार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, एनएसयूआई, आपसू, आजसू छात्र संघ, जेसीएम सहित अन्य ने प्रशासन और विश्वविद्यालय से शीघ्र पहल कर सत्र को नियमित करने, परीक्षाओं में तेजी लाने और लंबित रिजल्ट जल्द जारी करने की अपील की है।