श्रृंगला ने कहा कि 2014 से 2025 के बीच भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है। आज देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 500 गीगावॉट (जी डब्ल्यू) से ज्यादा हो चुकी है, जिसमें 50 प्रतिशत से अधिक गैर-जीवाश्म स्रोतों से है। सौर ऊर्जा 2014 में 2.8 गीगावॉट से बढ़कर 2025 में 100 गीगावॉट से ज्यादा हो गई है। भारत ने 2030 का लक्ष्य 5 साल पहले ही हासिल कर लिया। उन्होंने कहा कि सौर और पवन ऊर्जा जरूरी हैं, लेकिन ये हर समय उपलब्ध नहीं रहतीं। देश को चौबीसों घंटे साफ और भरोसेमंद बिजली देने के लिए परमाणु ऊर्जा जरूरी है, खासकर जब बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है और पुराने कोयला संयंत्र बंद होने वाले हैं।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक निजी और विदेशी निवेश की अनुमति देता है, लेकिन यूरेनियम संवर्धन, ईंधन प्रबंधन और सुरक्षा जैसे संवेदनशील काम सरकार के पास ही रहेंगे। यह “निजीकरण नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ साझेदारी” है।
उन्होंने बताया कि भारत की मौजूदा परमाणु क्षमता 8.8 जीडब्ल्यू है और इसे 2047 तक 100 जीडब्ल्यू तक ले जाने का लक्ष्य है, जिसके लिए करीब 19.28 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी। यह बिल नियमों को स्पष्ट और आसान बनाता है, ताकि निवेशकों को भरोसा मिले।
श्रृंगला ने कहा कि पश्चिम एशिया के सॉवरेन वेल्थ फंड्स छोटे परमाणु रिएक्टर (एसएमआर) में निवेश में रुचि दिखा रहे हैं। दुनिया के 22 से ज्यादा देशों ने सीओपी 28 में 2050 तक परमाणु क्षमता तीन गुना करने का संकल्प लिया है। उन्होंने संसद से शांति विधेयक का समर्थन करने की अपील की।
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