ग्रामीणों के अनुसार सरपंच रामदुलारी राठिया, सचिव रविन्द्र निषाद और ग्राम पटेल लालसाय राठिया ने 13 अक्टूबर 2025 को एसईसीएल को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया, जबकि ग्राम सभा की बैठक 14 अक्टूबर 2025 को दिखाया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम सभा की तिथि बाद में गढ़ी गई तथा ग्राम सभा की पंजी में जाली हस्ताक्षर कर बैठक को वैध दिखाने का प्रयास किया गया। उक्त बैठक के लिए नियुक्त ग्राम सभा अध्यक्ष रामधन राठिया ने स्वयं स्पष्ट किया कि उन्हें बैठक की जानकारी तक नहीं थी। ग्राम सभा के रजिस्टर में उनके जाली हस्ताक्षर मिलने से मामला और गंभीर हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सीधे-सीधे प्रशासनिक धोखाधड़ी और नियमों का उल्लंघन है, जिससे पारा
उरबा पंचायत की अनापत्ति प्रमाण पत्र विवाद और गर्म हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस अवैधानिक अनापत्ति के संबंध में कई बार एसईसीएल प्रबंधन और कलेक्टर रायगढ़ को लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई। इससे ग्रामीणों में तीव्र असंतोष व्याप्त है। वन भूमि के मामले को देखते हुए ग्रामीण इस पूरे प्रकरण को एक गंभीर भूमि विवाद की श्रेणी में बता रहे हैं।
ग्रामवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि 13 अक्टूबर को जारी अवैध अनापत्ति प्रमाण पत्र को तत्काल निरस्त किया जाए, 14 अक्टूबर की दिखावटी ग्राम सभा को अवैध घोषित किया जाए, और संबंधित जिम्मेदारों—सर्पंच, सचिव एवं ग्राम पटेल—पर कठोर कार्रवाई की जाए।