अटलजी और मालवीय जी ने दिखाया कि सच्चा नेतृत्व सत्ता और राजनीति से ऊपर होता है : राजनाथ सिंह

नई दिल्ली, 03 जनवरी । “राजनीति सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं बल्कि जनसेवा का पवित्र दायित्व है। लोकतंत्र तभी स्थायी रहता है, जब वह चरित्र, नैतिकता और सत्यनिष्ठा से निर्देशित हो” यह बात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कही, जब वे दिल्ली विधानसभा में पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी और भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के चित्रों के अनावरण समारोह में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि दोनों नेता नैतिक ईमानदारी, लोकतांत्रिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता के सर्वोच्च मानक स्थापित करते हैं और उनका सार्वजनिक आचरण आज भी नैतिक राजनीति, उद्देश्य की एकता और दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने में मार्गदर्शक है।

यह कार्यक्रम दिल्ली विधानसभा परिसर में विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, प्रख्यात पत्रकार एवं पद्म भूषण से सम्मानित राम बहादुर राय, दिल्ली सरकार के संसदीय कार्य मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, की उपस्थिति में आयोजित हुआ।

इसके अतिरिक्त राज्य मंत्री (सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय) हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, विधायक, पार्षद, पूर्व सांसद, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

इस अवसर पर सभी अतिथियों ने महान नेताओं को पुष्पांजलि अर्पित की, जिसके बाद विधान सभा सदन में उनके चित्रों का अनावरण किया गया, जो भारत की संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक विरासत को समर्पित एक गरिमामयी श्रद्धांजलि है। कार्यक्रम के दौरान पत्रकार एवं इतिहासकार गुंजन अग्रवाल द्वारा लिखित कॉफी टेबल बुक “भारत माता” का विमोचन रक्षा मंत्री ने किया। इसके उपरांत दोनों भारत रत्न विभूतियों के जीवन और योगदान पर आधारित डॉक्यूमेंट्री “संसदीय पथ के आलोक स्तंभ” का प्रदर्शन भी किया गया।

अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने कहा कि जब राष्ट्र श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म शताब्दी मना रहा है, ऐसे समय में इस ऐतिहासिक सदन में अटल जी और महामना मालवीय जी के चित्रों का अनावरण विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली विधान सभा केवल एक भवन नहीं बल्कि वह जीवंत संस्था है जहां विचार, विमर्श और संवाद के माध्यम से भारत की लोकतांत्रिक चेतना का विकास हुआ है। स्वतंत्रता से पूर्व ही सरदार विठ्ठलभाई पटेल, गोपाल कृष्ण गोखले, मोतीलाल नेहरू और पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे नेताओं ने इन्हीं लोकतांत्रिक मंचों पर भारत की वैचारिक आधारशिला रखी। यह अवसर केवल दो महान व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि नहीं बल्कि नैतिक राजनीति, शिक्षा आधारित राष्ट्र निर्माण, संसदीय गरिमा और जनसेवा जैसे शाश्वत मूल्यों की पुनः पुष्टि है।

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इस दिन को विधानसभा के लिए गौरव और हर्ष का क्षण बताते हुए कहा कि दोनों भारत रत्न विभूतियां, जो 25 दिसंबर को जन्मी थीं , उन्हें 25 दिसंबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संयुक्त रूप से भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री द्वारा चित्रों का अनावरण इस अवसर को ऐतिहासिक महत्व प्रदान करता है और दिल्ली विधान सभा से एक सशक्त राष्ट्रीय संदेश देता है।

महामना पंडित मदन मोहन मालवीय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को नमन करते हुए अध्यक्ष गुप्ता ने कहा कि आधुनिक भारत की आत्मा, दिशा और दृष्टि की कल्पना इनके योगदान के बिना संभव नहीं है। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना में मालवीय जी की भूमिका तथा केंद्रीय और इंपीरियल विधान परिषद में उनके संसदीय योगदान का उल्लेख किया। अटलजी की लोकतांत्रिक संवेदनशीलता को स्मरण करते हुए उन्होंने एक व्यक्तिगत प्रसंग साझा किया, जो यह दर्शाता है कि अटल जी मानते थे कि शासन की शुरुआत समाज के गरीब, वंचित और पीड़ित वर्ग की चिंता से होनी चाहिए, एक ऐसा आदर्श जो आज भी सार्वजनिक नीति का मार्गदर्शन करता है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “ये चित्र केवल विधानसभा की दीवारों पर टंगे चित्र नहीं हैं, बल्कि भारत के वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शक प्रकाश स्तंभ हैं।” उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र निर्माण को समर्पित किया और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को कर्म में जिया। कॉफी टेबल बुक के विमोचन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ सिद्ध होगी तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु ऐसे महापुरुषों के आदर्शों का अनुसरण आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इन चित्रों की स्थापना केवल अतीत को नमन नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। महामना मालवीय जी और अटल बिहारी वाजपेयी जी की दृष्टि, समर्पण और सिद्धांत आज भी नागरिकों, विद्यार्थियों और नीति निर्धारकों का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी विरासत को सेवा, ईमानदारी और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के माध्यम से आगे बढ़ाना प्रत्येक भारतीय का दायित्व है।