पूर्वी सिंहभूम में जागरूकता अभियानों के बीच अतिक्रमण, अव्यवस्था और सवालों में घिरी यातायात पुलिस

पूर्वी सिंहभूम, 20 जनवरी । पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन की ओर से 01 से 31 जनवरी तक पूरे जिले में सड़क सुरक्षा माह मनाया जा रहा है। इस क्रम में उपायुक्त ने प्रेस वार्ता कर जनवरी माह में आयोजित जागरूकता और प्रवर्तन कार्यक्रमों की जानकारी दी तथा नागरिकों से सुरक्षित सड़क व्यवहार अपनाने की अपील की। प्रशासन का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और नियमों के प्रति जिम्मेदारी बढ़ाना बताया गया।

उपायुक्त के अनुसार, 01 जनवरी को जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर अभियान की शुरुआत की गई। इसके बाद नियम तोड़ने वालों को प्रतीकात्मक रूप से फूल-माला पहनाना, बस स्टैंडों पर स्वास्थ्य जांच शिविर, नशे में वाहन चलाने के खिलाफ विशेष जांच, सरकारी कर्मियों को शपथ, ओवरलोडिंग व गलत दिशा में वाहन चलाने पर कार्रवाई जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके अलावा नुक्कड़ नाटक, स्कूल जागरूकता, ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान, गुड सेमेरिटन योजना और हिट एंड रन मुआवजा सहायता शिविर भी लगाए गए।

प्रेस वार्ता में उपायुक्त ने दो टूक कहा कि हेलमेट, सीट बेल्ट, गति सीमा और नशे में ड्राइविंग से परहेज ही दुर्घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है। लेकिन इन दावों के ठीक उलट, शहर की व्यस्त सड़कों पर हालात चिंताजनक बने हुए हैं।

उन्होंने कहा कि जमशेदपुर का दिल कहे जाने वाला साकची बाजार आज पैदल यात्रियों के लिए सबसे असुरक्षित इलाकों में शामिल हो चुका है। फुटपाथ पूरी तरह दुकानों के कब्जे में हैं, जबकि सड़कें ठेले, ऑटो और अवैध पार्किंग से जाम रहती हैं। मजबूरी में पैदल यात्री सड़क पर चलने को विवश हैं, जहां हर पल दुर्घटना का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह अतिक्रमण अचानक नहीं, बल्कि यातायात पुलिस की मौन सहमति से फल-फूल रहा है। जुगसलाई, मानगो, बिष्टुपुर खाऊ गली, सिदगोड़ा, धातकीडीह और कदमा जैसे इलाके भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं।

उपायुक्त ने कहा कि सड़क सुरक्षा के नाम पर यातायात पुलिस की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। हेलमेट जांच के दौरान पुलिसकर्मियों के पेड़ों, मोड़ों और झोपड़ियों की आड़ में छिपकर कार्रवाई करने के आरोप आम हैं। अचानक रोकने-दौड़ाने की वजह से कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं के बाद पुलिस और आम लोगों के बीच टकराव भी सामने आया, जिसको लेकर आजसू, भाजपा समेत कई राजनीतिक दलों ने आंदोलन किया। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर यातायात व्यवस्था में ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा।

उपायुक्त ने कहा कि हेलमेट, सीट बेल्ट, गति सीमा का पालन और नशे में वाहन न चलाना दुर्घटनाओं को रोकने के प्रभावी उपाय हैं। हालांकि, प्रशासनिक दावों के विपरीत शहर की सड़कों की जमीनी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा को प्रभावी बनाने के लिए स्थायी अतिक्रमण हटाओ अभियान, फुटपाथों को पैदल यात्रियों के लिए मुक्त करना, सुरक्षित क्रॉसिंग, ट्रैफिक सिग्नल, जेब्रा लाइन और स्ट्रीट लाइट की बेहतर व्यवस्था जरूरी है। साथ ही यातायात जांच को पारदर्शी बनाकर भय के बजाय सुरक्षा का भाव पैदा करना होगा।

सड़क सुरक्षा तभी सफल होगी, जब नियम केवल कार्यक्रमों और भाषणों तक सीमित न रहकर ईमानदारी से सड़कों पर लागू किए जाएं।————-