जोधपुर, 27 जनवरी । जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा आयोजित तथा पीएम उषा योजना द्वारा प्रायोजित सात दिवसीय कार्यशाला राजस्थान के इतिहास लेखन में देशी स्रोतों का योगदान का प्रारम्भ आज इतिहास विभाग परिसर में हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान हिस्ट्री कांग्रेस के सचिव प्रो. एसपी व्यास ने अपने उद्बोधन में इतिहास लेखन में स्थानीय देशी स्रोतों के महत्व पर बल देते हुए विभिन्न अभिलेखीय उदाहरण प्रस्तुत किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कला, शिक्षा एवं समाज विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. एएल मीणा ने कहा कि राजस्थान जैसे समृद्ध सांस्कृतिक प्रदेश के इतिहास को समझने के लिए देशी स्रोतोंजैसे अभिलेख, शिलालेख, वंशावलियां, लोक परंपराएं और प्राचीन दस्तावेज का वैज्ञानिक अध्ययन अत्यंत आवश्यक है।
मुख्य वक्ता प्रो. के.एल. माथुर ने देशज स्रोतों के की विविध विधाओं की तकनीक को स्पष्ट किया। विशिष्ट अतिथि प्रो. अरविंद परिहार एवं प्रो. सुखबीर बैंस ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के प्रारंभ में विभागाध्यक्ष प्रो. सुशीला शक्तावत ने स्वागत भाषण दिया। आयोजन सचिव डॉ. रश्मि मीना ने सात दिवसीय कार्ययोजना प्रस्तुत किया। सह सचिव डॉ भरत देवड़ा ने बताया कि कार्यशाला के दौरान राजस्थान के इतिहास से संबंधित विविध देशी स्रोतों एवं इतिहास लेखन की विभिन्न विधाओं पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। अंत में डॉ. भरत देवड़ा ने सभी का आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम का संचालन डॉ. ललित पंवार ने किया।