धारा के विपरीत चलने वालों को करना पड़ता है हर दिन नई चुनौतियों का सामना

अजमेर, 27 जनवरी। जो भी प्रचलित धारा के विपरीत चलने का साहस करता है, वह व्यक्ति हो या पत्रिका, उसे हर दिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

लघु पत्रिकाओं का काम सिर्फ कविता और कहानी का प्रकाशन नहीं है बल्कि उनके लिए लोकहित के मुद्दों को स्वर देना और लोकविरोधी कामों का प्रखरता से प्रतिरोध करना भी आवश्यक है।

अजमेर में आयोजित दो दिवसीय लघु पत्रिका सम्मेलन के समापन पर यह विचार उभरकर सामने आया । राजस्थान साहित्य अकादमी और रजा फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन का आयोजन अजमेर से निकलने वाली प्रतिष्ठित पत्रिका लहर के संपादक और कवि स्व. प्रकाश जैन के जन्मशताब्दी उत्सव के अंतर्गत किया गया था।

सम्मेलन के दूसरे दिन दो सत्रों का आयोजन किया गया। लघु पत्रिका : बढ़ती चुनौतियां विषय पर आयोजित प्रथम सत्र की अध्यक्षता जीवन सिंह, सूरज पालीवाल तथा हेमेंद्र चंडालिया ने की। इस सत्र में वक्ता के रूप में सहभागी ज्ञानचंद बागड़ी, रमेश खत्री, ओमेंद्र, हिम्मत सेठ तथा नीलिमा टिक्कू ने लघु पत्रिकाओं के साथ-साथ देश और समाज के समक्ष उपस्थित चुनौतियों पर भी विस्तार से विवेचन किया।

ज्ञानचंद बागड़ी ने कहा कि लघु पत्रिकाओं में बाजार की शर्तें न मानने का नैतिक बल है। इसे कायम रखने के लिए समर्पित पाठक वर्ग तैयार करना जरूरी है। हिम्मत सेठ ने कहा कि समाज में चेतना के निर्माण में लघु पत्रिकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ओमेंद्र ने कहा कि हिम्मत सेठ ने इस बात को रेखांकित किया कि किसी भी पत्रिका को साँस लेने के लिए लोकतंत्र के खुलेपन की जरूरत होती है। ओमेंद्र ने कहा कि व्यक्ति और पत्रिका दोनों को हर दिन विभिन्न चुनौतियों का सामना करते हुए ही मार्ग निकालना पड़ता है।

हेमेंद्र चंडालिया ने इस बात पर चिंता जताई कि इन दिनों जो गलत हो रहा है, उसे नार्मल मानने की एक परम्परा शुरू हो गई है। सूरज पालीवाल ने कहा कि राजनीति और साहित्य को अलग नहीं किया जा सकता। जिसमें राजनीतिक विवेक नहीं है, वह कभी बड़ी रचना नहीं कर सकता। जीवन सिंह ने कहा कि पूंजी और बाजार के गठजोड़ से जो चुनौतियां समाज के सामने उत्पन्न हुई हैं, उन्हीं चुनौतियों का सामना लघु पत्रिकाओं को भी करना पड़ रहा है। सत्र का संचालन पराग मांदले ने किया।

सम्मेलन एक विषय नई पीढ़ी और लघु पत्रिकाएं था। इस सत्र की अध्यक्षता प्रबोध गोविल और गोपाल माथुर ने की। इस सत्र में विशाल विक्रम सिंह, अजय अनुरागी, राजेश चौधरी, माणिक, विष्णु शर्मा और उर्मिला वक्ता के रूप में सम्मिलित हुए। इस सत्र में सभी वक्ता इस बात पर एकमत थे कि यदि लघु पत्रिकाओं और उसके माध्यम से समाज में प्रतिरोध की आवाज को बचाए रखने के लिए इनसे नई पीढ़ी को जोड़ना बहुत जरूरी है। इसके लिए आवश्यक है कि नई पीढ़ी जिन माध्यमों का सहजता से उपयोग करती है, उन माध्यमों का उपयोग लघु पत्रिकाओं के प्रचार-प्रसार के लिए किया जाए। डिजिटल माध्यमों तक नई पीढ़ी की सहज पहुँच को मद्देनजर रखते हुए कागज के साथ-साथ डिजिटल रूप में पत्रिका की उपलब्धता की जरूरत भी वक्ताओं ने व्यक्त की। हंस की प्रबंध निदेशक रचना यादव ने भी विचार व्यक्त किए।कार्यक्रम का संचालन विनीता बाडमेरा ने किया। आभार प्रदर्शन अनंत भटनागर ने किया।