कृषि के साथ मधुमक्खी पालन से बढ़ेगी किसानों की आय: कृषि मंत्री

जयपुर, 24 जनवरी । कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने कहा है कि प्रदेश के किसानों और पशुपालकों के आर्थिक विकास एवं सशक्तीकरण के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में नवीन तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाएं, जिससे आय में वृद्धि हो और किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

डॉ. किरोड़ी लाल शनिवार को कृषि प्रबंध संस्थान दुर्गापुर में आयोजित “हाई वैल्यू मधुमक्खी उत्पादन: तकनीकी, वर्तमान परिदृश्य, भविष्य एवं संभावनाएं” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय सेमिनार के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश का किसान मेहनती और ईमानदार है तथा नवाचार के माध्यम से कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में राजस्थान को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के कारण किसान तेजी से प्रगतिशील बन रहे हैं।

कृषि मंत्री ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अनुसार मधुमक्खी पालन से संबंधित क्षेत्रों में फसलों की पैदावार में 20 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि राजस्थान का विशाल भौगोलिक क्षेत्र और यहां उपलब्ध जंगली एवं कृषि वनस्पतियों की विविधता मधुमक्खी पालन के लिए अत्यंत अनुकूल है। मकरंद और पराग की प्रचुर उपलब्धता के कारण प्रदेश में मधुमक्खी पालन किसानों के लिए आय का एक मजबूत और स्थायी स्रोत बन चुका है।

डॉ. किरोड़ी लाल ने बताया कि देश के कुल शहद उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी करीब नौ प्रतिशत है और प्रदेश देश के पांच प्रमुख शहद उत्पादक राज्यों में शामिल है। वर्तमान में प्रदेश में 3 हजार 350 मधुमक्खी पालकों के पास दो लाख 76 हजार मधुमक्खी कॉलोनियां हैं, जिनसे लगभग 8 हजार 500 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हो रहा है। शहद उत्पादन में अलवर, भरतपुर और हनुमानगढ़ जिले अग्रणी हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा 50 हजार मधुमक्खी कॉलोनियां और 50 हजार मधुमक्खी बॉक्स वितरित किए जा रहे हैं, जिन पर 40 प्रतिशत अनुदान के रूप में कुल 8 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है। पराग की अनुपलब्धता और अधिक तापमान की स्थिति में मधुमक्खी कॉलोनियों के माइग्रेशन के लिए राज्य के एक हजार मधुमक्खी पालकों को प्रति पालक 9 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है।

कृषि मंत्री ने बताया कि मधुमक्खी पालकों को वैज्ञानिक पद्धति से शहद उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा 2 करोड़ रुपये की लागत से एक हजार मधुमक्खी पालकों को मधुमक्खी पालन किट भी वितरित की जा रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत भरतपुर और टोंक जिलों में 10-10 करोड़ रुपये की लागत से मधुमक्खी पालन के उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहां मधुमक्खी पालकों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्ता युक्त कॉलोनियां, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, विपणन और शहद की गुणवत्ता जांच जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

डॉ. किरोड़ी लाल ने कहा कि राज्य सरकार मधुमक्खी पालकों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और शहद उत्पादन से जुड़ी समस्याओं तथा पालकों की मांगों को प्राथमिकता से पूरा किया जाएगा। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को शहद के प्रचार-प्रसार और आमजन को इसके स्वास्थ्य लाभों के प्रति जागरूक करने के निर्देश भी दिए।