जींद : सनातन धर्म की परंपराओ में बसती भारतीय संस्कृति की आत्मा : कृष्ण बेदी

जींद, 22 फ़रवरी । हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने कहा है कि सनातन धर्म की परंपराएं केवल धार्मिक अनुष्ठान नही बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। पर्यावरण शुद्धि तथा आमजन को सनातन संस्कृति से जोडऩे के उद्देश्य से 108 कुंडीय महायज्ञ जैसे भव्य आयोजन समाज को एकजुट करने और राष्ट्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कैबिनेट मंत्री शनिवार देर सायं जगतगुरु पीठाधीश चक्रवर्ती यज्ञ सम्राट श्रीश्री 1008 हरिओम महाराज के सान्निध्य में किया जा रहा 103वां महायज्ञ की महाआरती में शामिल होकर लोगों को संबोधित कर रहे थे। केबिनेट मंत्री ने कहा कि भारत भूमि सदियों से संतों, ऋषि मुनियों और महापुरुषों की तपोभूमि रही है। भारतीय संस्कृति का मूल आधार आध्यात्मए नैतिकता और मानवता के उच्च आदर्शों पर टिका हुआ है। हमारे संत, महापुरुषों ने अपने उपदेशों, तप और त्याग से समाज को सत्य, अहिंसा, करुणा और सेवा का मार्ग दिखाया है। प्राचीन काल से ही भारत में ज्ञान की परंपरा रही है। वेद, उपनिषद, पुराण और महाकाव्य जैसे ग्रंथों ने मानव जीवन को दिशा देने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि जहां रामायण हमें मर्यादा, कर्तव्य और आदर्श जीवन का संदेश देती है वहीं महाभारत धर्म और अधर्म के संघर्ष के माध्यम से सत्य की विजय का संदेश देती है। इसी प्रकार भगवद्गीता जीवन के प्रत्येक संकट में कर्तव्य पालन, कर्मयोग और आत्मबल की प्रेरणा प्रदान करती है। भारतीय संस्कृति में संत, महापुरुषों का योगदान अतुलनीय रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे प्राचीन ग्रंथ केवल धार्मिक पुस्तकें नही बल्कि जीवन प्रबंधन, नैतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता के मार्गदर्शक हैं। इन ग्रंथों में वर्णित सिद्धांत आज के आधुनिक युग में भी उतने ही सार्थक हैं। जितने प्राचीन काल में थे। परिवार, समाज और राष्ट्र की उन्नति के लिए आवश्यक है कि हम अपनी सांस्कृतिक विरासत और संतों के आदर्शों को आत्मसात करें। उन्होंने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रम एक देश, एक चुनाव जैसी राष्ट्रीय मुहिम के उद्देश्य को भी बल प्रदान करते हैं। क्योंकि ये समाज में एकता, जागरूकता और सामूहिक सहभागिता की भावना को सुदृढ़ करते हैं।