अमेठी : महिला बीएलओ से अभद्रता का आरोप, राजनीतिक बयानबाज़ी तेज

अमेठी, 05 फ़रवरी । उत्तर प्रदेश के अमेठी जनपद के संग्रामपुर ब्लॉक अंतर्गत ठेंगहा गांव में एक महिला बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) से कथित अभद्रता, दबाव बनाने और उनके पति से मारपीट के आरोपों को लेकर मामला तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के बाद प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ जिले की राजनीति भी गरमा गई है।

बीएलओ सुभद्रा मौर्य के पति राकेश मौर्य ने एसडीएम अमेठी को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी सरकारी बीएलओ हैं।पार्टी की बैठक में भाजपा जिलाध्यक्ष की मौजूदगी में बीएलओ को बुलाकर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई और घटना का वीडियो बनाने के दौरान उनका मोबाइल भी छीन लिया गया। उन्होंने बताया कि इसके बाद से उन्हें और उनकी पत्नी को लगातार डराया-धमकाया जा रहा है।

राकेश मौर्य ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ठेंगहा गांव में भाजपा की बैठक चल रही थी, जिसमें सरकारी बीएलओ को बुलाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि बीएलओ किसी राजनीतिक दल की कार्यकर्ता नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारी हैं। इसी को लेकर विवाद बढ़ा और हाथापाई की स्थिति बन गई।

वहीं बीएलओ सुभद्रा मौर्य ने बताया कि उनके पति के साथ मारपीट हुई और वीडियो बनाते समय मोबाइल छीन लिया गया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा जिलाध्यक्ष स्वयं मारपीट में शामिल नहीं थे।

मामला सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इसे गंभीर मामला बताते हुए महिला बीएलओ पर वोट कटवाने का दबाव बनाने का आरोप लगाया और कार्रवाई की मांग की। अमेठी सांसद किशोरी लाल शर्मा ने भी घटना को लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर हमला बताया।

दूसरी ओर, गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि बीएलओ के पति कांग्रेस पदाधिकारी हैं और राजनीतिक उद्देश्य से यह मामला उछाला जा रहा है।

भाजपा जिलाध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने भी सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि यह झूठा नेरेेटिव गढ़ने की कोशिश है क्योंकि लगातार बढ़ रही लोकप्रियता के कारण अमेठी में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पार्टी के लोग परेशान हैं। फिलहाल मामला प्रशासन और चुनाव आयोग के संज्ञान में है। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।