राजगढ़ः लैंगिक अपराध में कथन बदलने पर डीएनए रिपोर्ट के आधार पर आरोपित को आजीवन कारावास की सजा

राजगढ़, 10 फरवरी । विशेष न्यायालय पाॅक्सो एक्ट राजगढ़ द्वारा प्रकरण में पीड़ित और साक्षियों के बदलने के बाद डीएनए रिपोर्ट के आधार पर आरोपित को आजीवन कारावास एवं 11 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

प्रकरण में सहायक अभियोजन निदेशक आलोक श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में शासन की ओर से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजन अधिकारी मथुरालाल ग्वाल ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि 14 फरवरी 2025 की रात 9 बजे कालीपीठ निवासी नाबालिग किशोरी गांव की डेयरी से दूध लेकर घर लौट रही थी तभी आरोपित बाइक से आया और उसे जबरन बाइक पर बैठाकर गौशाला के पीछे ले गया, जहां उसने गलत काम किया साथ ही किसी से कहने की बात पर जान से मारने की धमकी देते हुए बाइक से घर के सामने छोड़ गया। पुलिस ने पीड़ित की रिपोर्ट पर आरोपित के खिलाफ धारा 137(2), 87, 64(1), 65(1), 351(3) बीएनएस, 3/4 पाॅक्सो एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया। विवेचना के दौरान पीड़ित के वीडियोग्राफी कथन लेखबद्व किए गए साथ ही मेडिकल परीक्षण किया गया और घटना के समय पहने गए कपड़े जब्त कर डीएनए सेंपलिंग की कार्रवाई की गई। पुलिस ने आरोपित को हिरासत में लेकर घटना में प्रयुक्त बाइक जब्त की। विचारण के दौरान न्यायालय ने अभियोजन के तर्कों से सहमत होकर अभियुक्त जितेन्द्र वर्मा को आजीवन कारावास की सजा एवं 11 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।

उल्लेखनीय है कि उक्त प्रकरण में पीड़ित और साक्षीगण आरोपित के प्रभाव में आकर न्यायालय में अपने बयानों से पलट गए। अभियोजन ने चिकित्सक और डीएनए करने वाले वैज्ञानिक अधिकारी के साक्ष्य न्यायालय के समक्ष कराए साथ ही पाॅजीटिव डीएनए रिपोर्ट को मुख्य आधार बनाया गया एवं प्रभावी बहस न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की। इस आधार पर न्यायालय ने आरोपित को दोषी पाते हुए दंड से दंडित किया। न्यायालय के द्वारा दिए गए निर्णय के माध्यम से राजगढ़ जिले में बालिकाओं के साथ होने वाले अपराधों के आरोपितों को एक कड़ा संदेश दिया, जिससे लैंगिक अपराध के आरोपित की यह भ्रांति दूर हुई है कि लैंगिक अपराध कारित करने के बाद फरियादी पक्ष से राजीनामा करने के बाद भी न्यायालय मूकदर्शन बने हुए नही रह सकता। अपराधी अपने किए गए अपराध के लिए दंड का भागी बनेगा।