नई दिल्ली/बहराइच, 09 फ़रवरी । जमीअत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी ने कहा कि भारत की असली ताक़त आपसी एकता, प्रेम और भाईचारे में है। कुछ ताक़तें इस सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करना चाहती हैं, लेकिन वे कभी सफल नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि बिखरे हुए दिलों को जोड़ना अहम इबादत है और यही भारत की साझा संस्कृति की आत्मा है।
मौलाना हकीमुद्दीन क़ासमी ने यह बातें बहराइच ज़िले के बांसगांव-पुरैनि क्षेत्र में जमीअत उलमा (क्षेत्र बांसगांव-पुरैनि) के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय एकता एवं सद्भावना कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं।
कार्यक्रम में उलमा, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, अधिवक्ता, क्षेत्र के गणमान्य नागरिक तथा पुलिस विभाग के अधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
अपने संबोधन में मौलाना क़ासमी ने पंजाब में आई हालिया बाढ़ का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कई क्षेत्र प्राकृतिक आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुए, तब जमीअत उलमा-ए-हिंद ने तुरंत राहत शिविर स्थापित किए और धर्म, जाति व समुदाय के भेदभाव के बिना पीड़ितों की सेवा की। उन्होंने कहा कि सेवा और त्याग की इसी भावना के कारण आम लोगों ने जमीअत को “सेवा वाली जमात” कहा।
उन्होंने कहा कि जमीअत उलमा-ए-हिंद के बुजुर्गों ने हमेशा देश के विभाजन और दो-राष्ट्र सिद्धांत का विरोध किया तथा संयुक्त राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय एकता और देश की अखंडता का समर्थन किया। मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के कथन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदू-मुस्लिम एकता ही भारत की आत्मा है और इस एकता को कमजोर करना देश की आत्मा को कमजोर करने के समान है।
कार्यक्रम की शुरुआत क़ारी अब्दुल मतीन की तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से हुई, जिसके बाद मौलवी ताहा नदवी ने नात-ए-रसूल प्रस्तुत की। प्रारंभिक वक्तव्य में मौलाना मारूफ़ ग़ाज़ीपुरी ने जमीअत उलेमा-ए-हिंद का परिचय देते हुए इसकी स्थापना, वैचारिक आधार और देश की आज़ादी से लेकर आज तक की सेवाओं पर प्रकाश डाला।
जमीअत उलेमा-ए-हिंद के सद्भावना मंच के संयोजक मौलाना महदी हसन ऐनी ने कहा कि मौजूदा समय में नफ़रत को खत्म करना सबसे बड़ा सामाजिक दायित्व है और इसके लिए संवाद, नुक्कड़ सभाएं और आपसी संपर्क सबसे प्रभावी माध्यम हैं।
मुफ़्ती महफ़ूज़ुर्रहमान क़ासमी ने कहा कि क़ुरआन के अनुसार एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या पूरी मानवता की हत्या के समान है।मौलाना मोहम्मद जमाल क़ासमी, महासचिव, जमीअत उलेमा ज़िला बाराबंकी ने सीरत-ए-नबवी की रोशनी में आपसी एकता पर बल दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुफ़्ती मोहम्मद सुहैब क़ासमी ने जमीअत उलेमा क्षेत्र बांसगांव-पुरीनी की धार्मिक, सामाजिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों की सराहना की।
इस अवसर पर चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि सभी इंसान आपस में भाई-भाई हैं और समाज में फैलाई जा रही नफ़रत की जड़ राजनीति है।
एडवोकेट बालक राम सरोज ने कहा कि आज़ादी की लड़ाई में उलेमा की क़ुर्बानियां इतिहास का अहम हिस्सा हैं और भाईचारा ही देश की स्थिरता की बुनियाद है।
जमीअत उलेमा मध्य ज़ोन के अध्यक्ष मौलाना इस्लामुल हक़ असजद क़ासमी ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के कारण सामाजिक सौहार्द प्रभावित नहीं होना चाहिए। मौलाना हसन क़ासमी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जबकि मुफ़्ती ज़फ़र साहब की दुआ के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का संचालन मौलाना अरशद ने किया।बहराइच ज़िले के बांसगांव-पुरैनि क्षेत्र में जमीयत उलेमा (क्षेत्र बांसगांव-पुरैनि )के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय एकता एवं सद्भावना कार्यक्रम
कार्यक्रम में दीनी तालीमी बोर्ड, जमीअत उलेमा-ए-हिंद के नाज़िम मौलाना शुब क़ासमी के साथ मौलाना ज़बीहुल्लाह क़ासमी, मौलाना नूर अहमद नदवी, मौलाना ताज मोहम्मद क़ासमी, मौलाना सईद मज़ाहिरी, मौलाना अलीमुद्दीन, मौलाना अम्मार, हाफ़िज़ बरकतुल्लाह, हाजी रईस, मौलाना सलीम, मौलाना ख़ालिद, मौलाना सुहैल, मौलाना अरशद रईस, मौलाना आसिफ़ नदवी, हाफ़िज़ तौक़ीर, प्रधान जुनैद और भाई ज़कीउल्लाह भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में सामाजिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अन्य गणमान्य लोगों की भी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की व्यवस्था और शांति बनाए रखने में पुलिस विभाग के अधिकारियों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।