नई दिल्ली, 10 फ़रवरी । केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को देश के 12 फाइलेरिया प्रभावित राज्यों में फाइलेरिया (हाथीपांव) को खत्म करने के लिए वार्षिक दवा वितरण अभियान की शुरुआत की। यह अभियान वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों और अधिकारियों की मौजूदगी में शुरू किया गया।
इस अवसर पर
जेपी नड्डा ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का लक्ष्य 2027 तक भारत को फाइलेरिया मुक्त बनाना है, जोकि वैश्विक लक्ष्य 2030 से पहले है। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया मच्छरों से फैलने वाली बीमारी है, जो शरीर की लसीका प्रणाली (लिम्फोसाइट्स’)को नुकसान पहुंचाती है और लंबे समय तक विकलांगता, दर्द और सामाजिक भेदभाव का कारण बनती है।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या नहीं है बल्कि इससे लोगों की रोज़ी-रोटी और सामाजिक जीवन भी प्रभावित होता है, ऐसे में इसका खत्म होना बहुत जरूरी है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 348 जिलों में फाइलेरिया फैला हुआ है। इनमें से कई जिलों में दवा वितरण अभियान सफल रहा है, लेकिन अभी भी कई जगहों पर यह जारी है। अब तक लाखों लोग हाथीपांव और हाइड्रोसील जैसी बीमारियों से प्रभावित हैं।
जेपी नड्डा ने कहा कि दवा का सही तरीके से सेवन और लोगों को इसके लिए तैयार करना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए जन-जागरूकता, समुदाय की भागीदारी और भरोसा बनाना जरूरी है। पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय नेताओं से भी सहयोग की अपील की गई।
उन्होंने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर बीमारी की पहचान और इलाज में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हाइड्रोसील की सर्जरी को आयुष्मान भारत योजना में शामिल किया गया है ताकि मरीजों को मुफ्त इलाज मिल सके।
सरकार ने अब साल में दो बार की जगह साल में एक बार दवा वितरण अभियान चलाने का फैसला किया है, जिससे काम आसान होगा और निगरानी बेहतर हो सकेगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार, समाज और सभी विभागों के मिलकर काम करने से ही 2027 तक फाइलेरिया मुक्त भारत का सपना पूरा हो सकता है।