धर्मशाला, 11 फ़रवरी । हिमाचल प्रदेश आज जिस गहरे आर्थिक, प्रशासनिक और नैतिक संकट से गुजर रहा है, उसकी जड़ें वर्तमान कांग्रेस सरकार की अदूरदर्शी नीतियों, राजनीतिक अहंकार और कुप्रबंधन में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं। मंचों से बड़ी-बड़ी घोषणाएं, प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावनात्मक भाषण और विरोधियों पर दोषारोपण, यही इस सरकार की पहचान बन चुकी है। जमीनी स्तर पर न विकास दिख रहा है, न व्यवस्था, न संवेदनशीलता।
यह बात बुधवार को भाजपा कार्यालय सुलह में ‘एकात्म मानववाद’ एवं ‘अंत्योदय’ के प्रणेता, भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर विपिन सिंह परमार ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि इस दिवस को ‘समर्पण दिवस’ के रूप में श्रद्धा और संकल्प के साथ मनाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, त्याग और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उनके ‘एकात्म मानववाद’ और ‘अंत्योदय’ के सिद्धांत आज भी सुशासन और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं।
परमार ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि वह बार-बार प्रदेश की वित्तीय स्थिति का रोना रोते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि निर्णय लेने की क्षमता और स्पष्ट नीतिगत दिशा के अभाव ने हालात को और बदतर किया है। एक ओर कर्मचारियों को आर्थिक संकट का हवाला देकर संयम बरतने की सलाह दी जाती है, दूसरी ओर सरकार स्वयं अपने वादों और प्राथमिकताओं में पारदर्शिता नहीं दिखा पा रही। ओपीएस को लेकर भ्रम की स्थिति, वेतन और पेंशन संबंधी आशंकाएं, योजनाओं की धीमी रफ्तार,इन सबने लाखों परिवारों में असुरक्षा और अविश्वास का वातावरण पैदा कर दिया है।