धर्मशाला, 16 फ़रवरी । संस्कृत भारती के उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री नरेंद्र कुमार ने कहा कि राष्ट्र के लिए और समाज के लिए हमें उसी प्रकार चिन्तन करना चाहिए जिस प्रकार हम अपने शरीर, सौन्दर्य, धन एवं प्रतिष्ठा लिए करते हैं । इस समय हमें स्वतन्त्रता संग्राम के समान बलिदान की आवश्यकता नहीं है, केवल समाज और संस्कृति के लिए चिन्तन करने और समय देने की आवश्यकता है। संस्कृत भाषा एवं संस्कृत शास्त्रों का पठन-पाठन अनेक संस्थान कर रहे हैं किन्तु जब तक समाज में संस्कृत भाषा आम जनमानस की भाषा नहीं होगी, तब तक संस्कृति का पुनरुत्थान संभव नहीं है। इसके लिए तथा संस्कृत की दुरवस्था दूर करने के लिए समाज में संस्कृत भारती जैसे अनेक संगठन अहर्निश कार्य कर रहे हैं। यह विचार सोमवार को विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित दस दिवसीय आवासीय संस्कृत संभाषण प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन समारोह में बतौर मुख्य वक्ता रखे।
इससे पूर्व कार्यशाला के समन्वयक एवं हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो. योगेन्द्र कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया। समारोह की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय के अम्बेडकर अध्ययन केन्द्र में सहायक आचार्य डा. किस्मत कुमार ने की।
उन्होंने कार्यशाला के युवा प्रशिक्षणार्थियों को ज्ञान प्राप्ति के साथ-साथ समाज एवं राष्ट्र के लिए जागरूक होकर समय का दान देने का भी आह्वान किया।
समारोह के सारस्वत अतिथि के रूप में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के वेद व्यास परिसर बलहार के सह निदेशक प्रो. मञ्जुनाथ भट्ट ने कार्यशाला के प्रतिभागियों का उद्बोधन किया। इस अवसर पर कार्यशाला के प्रतिभागियों ने अपने दस दिनों के सुखद अनुभव साझा किए तथा नाटक का मंचन भी संस्कृत भाषा के माध्यम से प्रस्तुत किया।